राजनीति
बुनियादी ढांचे में खामी: ऑस्ट्रेलिया में घरेलू हिंसा का गहराता संकट और लैंगिक असमानता
ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 12:31 pm

ऑस्ट्रेलिया में महिला अपराधों में मामूली वृद्धि के बावजूद, पुरुष साथियों द्वारा की जाने वाली घरेलू हिंसा समाज के लिए एक बड़ा और गहरा खतरा बनी हुई है।
ऑस्ट्रेलिया में हाल ही में जारी आंकड़ों और सामाजिक विमर्श ने अपराध के बदलते स्वरूप पर एक नई बहस छेड़ दी है। हालांकि रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि महिलाओं द्वारा किए जाने वाले पूर्व-नियोजित अपराधों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा उस व्यापक संकट की तुलना में बेहद कम है जो पुरुष साथियों द्वारा की जाने वाली घरेलू हिंसा के रूप में मौजूद है। ऑस्ट्रेलिया में घरेलू हिंसा और इसके परिणामस्वरूप होने वाली हत्याएं एक ऐसी 'महामारी' का रूप ले चुकी हैं, जिसकी जड़ें समाज के बुनियादी ढांचे में गहराई से धंसी हुई हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में, यह मुद्दा और भी जटिल हो जाता है। प्रवासी समुदायों में घरेलू हिंसा अक्सर सांस्कृतिक दबाव, भाषा की बाधा और वीज़ा की अनिश्चितता के कारण रिपोर्ट नहीं की जाती। ICN24 द्वारा की गई पड़ताल के अनुसार, भारतीय समुदाय के भीतर घरेलू हिंसा के मामलों में 'दहेज' और 'पारिवारिक प्रतिष्ठा' जैसे कारक अक्सर पीड़ित को चुप रहने पर मजबूर कर देते हैं। सरकार और सामाजिक संस्थाओं का मानना है कि जब तक हम हिंसा के मूल कारणों—जैसे लैंगिक असमानता और सत्ता के असंतुलन—पर प्रहार नहीं करेंगे, तब तक यह बुनियादी खामी दूर नहीं होगी।
आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में हर साल दर्जनों महिलाएं अपने वर्तमान या पूर्व साथी के हाथों अपनी जान गंवाती हैं। हालांकि कानून प्रवर्तन एजेंसियां महिलाओं द्वारा बढ़ते अपराधों पर नज़र रख रही हैं, लेकिन उनका स्पष्ट मानना है कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा अभी भी घर के भीतर मौजूद पुरुष प्रधान हिंसा है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं द्वारा किए जाने वाले अपराध अक्सर आत्मरक्षा या लंबे समय से चले आ रहे उत्पीड़न की प्रतिक्रिया भी हो सकते हैं, जबकि पुरुष हिंसा अक्सर नियंत्रण और वर्चस्व की भावना से प्रेरित होती है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कई राष्ट्रीय योजनाओं की घोषणा की है, जिसमें भारतीय और अन्य दक्षिण एशियाई समुदायों के लिए विशेष भाषाई सहायता और कानूनी परामर्श शामिल हैं। 'नेशनल प्लान टू एंड वायलेंस अगेंस्ट वीमेन' के तहत, समुदाय-आधारित संगठनों को अधिक संसाधन दिए जा रहे हैं ताकि वे प्रवासियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर सकें।
निष्कर्षतः, 'बुनियादी ढांचे में खामी' केवल एक शीर्षक नहीं है, बल्कि यह एक कड़वी सच्चाई है। जब तक समाज और नीति निर्माता पुरुष हिंसा की इस व्यापकता को प्राथमिकता नहीं देते, तब तक महिलाओं द्वारा किए गए अपराधों की चर्चा केवल मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने वाली साबित होगी। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय को इस दिशा में खुलकर बात करने और पीड़ितों का समर्थन करने की आवश्यकता है, ताकि इस 'फाउंडेशन' को फिर से मजबूत किया जा सके।
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