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चुनाव आयोग का बड़ा कदम: 30 करोड़ वोटर कार्ड से हटेंगे धुंधले फोटो, अब '00' की जगह दर्ज होगा सही मकान नंबर
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 12:01 am
भारतीय निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में सुधार के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान शुरू किया है, जिसके तहत धुंधले फोटो और गलत पतों को बदला जाएगा।
भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने घोषणा की है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत अब लगभग 30 करोड़ मतदाता फोटो पहचान पत्रों (EPIC) में सुधार किया जाएगा। इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य पुराने कार्डों में मौजूद धुंधली तस्वीरों को हटाकर नई और स्पष्ट रंगीन तस्वीरें लगाना है। इसके साथ ही, अब मतदाता सूची में पते के कॉलम में मकान नंबर की जगह '00' लिखने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, यह अभियान अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गया है। आयोग की योजना शेष 39 करोड़ 73 लाख मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी जानकारी अपडेट करने की है। अब तक लगभग 59 करोड़ मतदाताओं का विवरण अपडेट किया जा चुका है, जिनके फोटो न केवल स्पष्ट हैं बल्कि आधुनिक तकनीक से युक्त रंगीन फॉर्मेट में हैं। इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए देशभर में 9 लाख 20 हजार से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तैनात किए गए हैं। ये अधिकारी मोबाइल ऐप के जरिए मतदाताओं के घर पहुंचकर मौके पर ही फोटो और पते का सत्यापन कर रहे हैं।
प्रशासनिक सुधारों की दृष्टि से पते के कॉलम में बदलाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्व में कई मामलों में स्पष्ट डेटा न होने के कारण बीएलओ मकान नंबर के स्थान पर '00' दर्ज कर देते थे, जिससे मतदाता की पहचान और पते के सत्यापन में कठिनाई होती थी। अब आयोग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक मतदाता का सटीक मकान नंबर और पूरा पता दर्ज किया जाए। इससे न केवल चुनावी गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ और पहचान के प्रमाण के रूप में वोटर कार्ड की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए भी यह खबर प्रासंगिक है। कई भारतीय नागरिक जो ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं लेकिन भारतीय पासपोर्ट धारक हैं, वे विदेशी मतदाता के रूप में पंजीकरण के पात्र हैं। भारत में मतदाता सूची के इस डिजिटल और भौतिक सुदृढ़ीकरण से उन प्रवासियों को सुविधा होगी जिनका स्थायी पता भारत में है। डेटा की सटीकता बढ़ने से विदेशी मतदाताओं के पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया भी भविष्य में और अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
चुनाव आयोग का यह कदम विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा, जहां अक्सर पहचान पत्रों में फोटो की गुणवत्ता खराब होती थी। नई प्रणाली के तहत, बीएलओ सीधे स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं, जिससे फोटो की गुणवत्ता सुनिश्चित हो रही है। इस सुधार अभियान से न केवल डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाने में मदद मिलेगी, बल्कि एक त्रुटिहीन और आधुनिक मतदाता डेटाबेस तैयार होगा जो आगामी चुनावों के लिए आधार बनेगा।
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