ऑस्ट्रेलिया
आर्थिक तंगी और सामाजिक विद्वेष बन रहे कट्टरपंथ की वजह: ऑस्ट्रेलियाई जांच आयोग का खुलासा
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 05:38 am

ऑस्ट्रेलिया में यहूदी-विरोधी भावनाओं की जांच कर रहे आयोग ने पाया है कि आर्थिक तंगी और व्यक्तिगत असंतोष युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेल रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में सामाजिक सौहार्द और सुरक्षा को लेकर चल रही एक महत्वपूर्ण न्यायिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यहूदी-विरोधी (anti-Semitism) भावनाओं और कट्टरपंथ के बढ़ते मामलों की पड़ताल कर रहे एक विशेष आयोग ने रेखांकित किया है कि कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रसार के पीछे केवल धार्मिक या राजनीतिक कारण ही नहीं हैं, बल्कि आर्थिक तंगी, महिलाओं के प्रति द्वेष (misogyny) और व्यक्तिगत शिकायतें भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
आयोग की हालिया सुनवाई के दौरान विशेषज्ञों ने गवाही दी कि किस तरह समाज के हाशिए पर मौजूद लोग, जो विशेष रूप से वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं, कट्टरपंथी समूहों के आसान शिकार बन जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जब व्यक्ति को लगता है कि मौजूदा व्यवस्था उसे आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है, तो वह चरमपंथी विचारधाराओं में समाधान ढूंढने लगता है। यह रुझान ऑस्ट्रेलिया के बहुसांस्कृतिक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
जांच में विशेष रूप से 'मिसोगिनी' या महिलाओं के प्रति बढ़ते विद्वेष को कट्टरपंथ की 'प्रवेश द्वार' (gateway) के रूप में देखा गया है। आयोग को बताया गया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय कई कट्टरपंथी समूह पहले युवाओं को लैंगिक आधार पर भड़काते हैं, जो बाद में नस्लीय और धार्मिक नफरत में बदल जाता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि प्रवासी समुदायों के युवाओं पर भी इस तरह के डिजिटल प्रोपेगेंडा का प्रभाव पड़ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के संदर्भ में, विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक अलगाव और आर्थिक असुरक्षा किसी भी समुदाय को प्रभावित कर सकती है। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में जीवन-यापन की बढ़ती लागत (cost of living) ने कई परिवारों पर दबाव बढ़ाया है। आयोग की यह चेतावनी महत्वपूर्ण है कि आर्थिक असमानता केवल एक वित्तीय समस्या नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है।
आयोग ने सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सुझाव दिया है कि वे कट्टरपंथ से निपटने के लिए केवल सुरक्षात्मक नजरिया न अपनाएं, बल्कि इसके मूल कारणों जैसे बेरोजगारी, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक अलगाव पर भी ध्यान दें। भारतीय मूल के लोगों सहित सभी प्रवासियों के लिए एक समावेशी वातावरण तैयार करना कट्टरपंथ के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। आने वाले समय में आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगा, जिसके आधार पर ऑस्ट्रेलिया की आंतरिक सुरक्षा नीतियों में बदलाव संभव हैं।
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