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ऑस्ट्रेलिया: कट्टरवाद के पीछे आर्थिक तंगी और सामाजिक कुंठाएं प्रमुख कारण, रॉयल कमीशन की जांच में खुलासा
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 05:37 am

ऑस्ट्रेलिया में यहूदी-विरोधी भावनाओं की जांच कर रहा रॉयल कमीशन अब उन सामाजिक और आर्थिक कारकों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो कट्टरवाद को बढ़ावा देते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में यहूदी-विरोध (anti-Semitism) की बढ़ती घटनाओं की जांच के लिए गठित रॉयल कमीशन ने अपनी हालिया सुनवाई में कट्टरपंथ के मूल कारणों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आयोग ने पाया है कि केवल विचारधारा ही नहीं, बल्कि आर्थिक तंगी, व्यक्तिगत कुंठाएं और महिलाओं के प्रति द्वेष (misogyny) भी समाज में कट्टरवाद फैलाने वाले प्रमुख कारक बनकर उभरे हैं। यह जांच रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला भारतीय समुदाय भी बढ़ती महंगाई और सामाजिक ध्रुवीकरण के प्रभावों को महसूस कर रहा है।
आयोग की कार्यवाही के दौरान विशेषज्ञों ने गवाही दी कि जब युवा या समाज के हाशिए पर रहने वाले लोग आर्थिक असुरक्षा का सामना करते हैं, तो वे अक्सर बाहरी ताकतों द्वारा फैलाए जा रहे दुष्प्रचार का शिकार हो जाते हैं। आर्थिक संकट की स्थिति में लोग अपनी विफलताओं के लिए किसी विशेष समुदाय या समूह को दोष देने लगते हैं, जिससे नफरत और कट्टरपंथ को फलने-फूलने का मौका मिलता है। आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि ऑनलाइन मंचों पर महिलाओं के प्रति नफरत फैलाने वाले समूह अक्सर कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रवेश द्वार (gateway) के रूप में कार्य करते हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में यह मुद्दा विशेष रूप से प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्रवासी समूहों में से एक है। हालांकि इस समुदाय ने ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन हाल के वर्षों में जीवन-यापन की लागत (cost of living) में वृद्धि और आवास संकट ने कई नए प्रवासियों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दबाव में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक चुनौतियों का समय पर समाधान नहीं किया गया, तो यह सामाजिक सामंजस्य (social cohesion) के लिए खतरा बन सकता है।
रॉयल कमीशन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि कैसे समाज के विभिन्न वर्गों में पनप रही नाराजगी को हिंसक कट्टरवाद में बदलने से रोका जा सके। आयोग ने संकेत दिया है कि केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से कट्टरवाद को नहीं रोका जा सकता; इसके लिए शिक्षा, रोजगार के अवसर और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसे क्षेत्रों में निवेश करना अनिवार्य है। विशेष रूप से उन युवाओं तक पहुंचना आवश्यक है जो डिजिटल स्पेस में कट्टरपंथी प्रोपेगेंडा के संपर्क में आ सकते हैं।
निष्कर्ष के तौर पर, यह जांच स्पष्ट करती है कि कट्टरवाद एक बहुआयामी समस्या है। भारतीय समुदाय के नेताओं ने भी इस बात पर जोर दिया है कि बहुसांस्कृतिक समाज की सुरक्षा के लिए समुदायों के बीच संवाद और आपसी समझ को बढ़ावा देना जरूरी है। रॉयल कमीशन आने वाले महीनों में अपनी विस्तृत सिफारिशें पेश करेगा, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि ऑस्ट्रेलिया में सभी समुदायों के लिए एक सुरक्षित और समावेशी वातावरण तैयार किया जा सकेगा।
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