राजनीति
डोंगरगढ़ भाजपा विवाद: 'मंडल के साथ अन्याय नहीं होगा', विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कार्यकर्ताओं को दिया आश्वासन
ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 09:39 pm

डोंगरगढ़ भाजपा मंडल भंग होने के बाद उपजे असंतोष के बीच डॉ. रमन सिंह ने नाराज पदाधिकारियों को संगठन स्तर पर चर्चा कर न्याय का भरोसा दिया है।
छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के भीतर उपजा आंतरिक गतिरोध अब गहराता जा रहा है। हाल ही में डोंगरगढ़ भाजपा मंडल को भंग किए जाने के निर्णय ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। इस संकट को सुलझाने के लिए नाराज कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मुलाकात की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से पार्टी की सेवा कर रहे हैं और अचानक बिना किसी ठोस कारण के इकाई को भंग करना उनके समर्पण का अपमान है।
इस मुलाकात के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी शिकायतें विस्तार से डॉ. सिंह के समक्ष रखीं और भंग किए गए मंडल को दोबारा बहाल करने की मांग की। डॉ. रमन सिंह ने कार्यकर्ताओं की बातों को धैर्यपूर्वक सुना और उन्हें स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया कि संगठन के स्तर पर किसी भी सक्रिय कार्यकर्ता या स्थानीय इकाई के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "मंडल के साथ अन्याय नहीं होगा। संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जाएगी और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए जल्द ही कोई उचित और न्यायोचित निर्णय लिया जाएगा।"
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से डोंगरगढ़ क्षेत्र में भाजपा के भीतर संगठनात्मक फेरबदल को लेकर खींचतान चल रही है। स्थानीय स्तर पर मंडल को भंग किए जाने के फैसले को कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने अपनी उपेक्षा के रूप में देखा। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि बिना किसी पूर्व सूचना या संवाद के जमीनी स्तर की इकाई को भंग करना पार्टी की सक्रियता और स्थानीय चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब सबकी नजरें पार्टी के प्रदेश नेतृत्व पर टिकी हैं।
डॉ. रमन सिंह, जो छत्तीसगढ़ भाजपा के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक हैं, का यह हस्तक्षेप पार्टी के भीतर अनुशासन और सामंजस्य बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष होने के नाते उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन एक अनुभवी नेता के रूप में उनकी बात कार्यकर्ताओं के लिए काफी वजन रखती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने और संगठन की प्रक्रिया पर भरोसा रखने की अपील की है।
प्रवासी भारतीयों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में बसे छत्तीसगढ़ी समुदाय के लिए, इस तरह के राजनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग अपने गृह राज्यों की राजनीति और शासन व्यवस्था पर गहरी नजर रखते हैं। डोंगरगढ़ जैसे धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता वहां के विकास कार्यों को प्रभावित करती है, जिसमें सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन में रहने वाले प्रवासी समुदाय की भी गहरी रुचि रहती है।
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