लाइव
राजनीति
राजनीति

डिजिटल संप्रभुता: विदेशी तकनीक पर ऑस्ट्रेलिया की निर्भरता और 'ऑफ स्विच' का खतरा

ICN24 Newsroom 15 जुल॰ 2026, 09:31 am
डिजिटल संप्रभुता: विदेशी तकनीक पर ऑस्ट्रेलिया की निर्भरता और 'ऑफ स्विच' का खतरा

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि विदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे पर ऑस्ट्रेलिया की अत्यधिक निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा कर सकती है।

ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां डिजिटल बुनियादी ढांचे की मजबूती सर्वोपरि हो गई है। हाल ही में प्रमुख तकनीकी विश्लेषक पॉल बुड्डे और अन्य विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए सवाल यह दर्शाते हैं कि ऑस्ट्रेलिया को अपनी 'डिजिटल संप्रभुता' की दिशा में और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। वर्तमान में, ऑस्ट्रेलिया का अधिकांश डिजिटल ढांचा विदेशी सरकारों, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका की कंपनियों और उनके कानूनी दायरे पर निर्भर है। डिजिटल संप्रभुता का अर्थ है कि किसी देश का अपने डिजिटल डेटा, बुनियादी ढांचे और एल्गोरिदम पर पूर्ण नियंत्रण होना। विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि राजनीतिक विवादों, प्रतिबंधों या निर्यात नियंत्रणों के कारण विदेशी कंपनियां अपनी सेवाएं वापस ले लेती हैं, तो ऑस्ट्रेलिया का आवश्यक ढांचा ठप हो सकता है। इसे 'ऑफ स्विच' का खतरा कहा जा रहा है, जहां एक विदेशी सत्ता किसी दूसरे देश की डिजिटल जीवन रेखा को बंद करने की क्षमता रखती है। यह मुद्दा भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया के आईटी क्षेत्र और तकनीकी नवाचार में इस समुदाय की बड़ी भागीदारी है। कई भारतीय मूल के पेशेवर और उद्यमी ऐसी प्रणालियों पर काम करते हैं जो अमेरिकी या अन्य विदेशी क्लाउड सेवाओं और सॉफ्टवेयर पर टिकी हैं। यदि इन सेवाओं में कोई व्यवधान आता है, तो न केवल व्यवसाय प्रभावित होंगे, बल्कि डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत गोपनीयता भी जोखिम में पड़ सकती है। भारत स्वयं 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत अपनी डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है, जो ऑस्ट्रेलिया के लिए एक उदाहरण हो सकता है। क्रिस्टोफर द्वारा 'एमेच्योर एथिसिस्ट' पर लिखे गए लेखों का हवाला देते हुए यह तर्क दिया गया है कि अमेरिकी तकनीकी प्रभुत्व अब कानून और सुरक्षा शक्तियों के इस्तेमाल से कमजोर हो रहा है। जब तकनीक का उपयोग कूटनीतिक हथियार के रूप में किया जाता है, तो ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे अपनी रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करें। ऑस्ट्रेलिया को केवल आयातित तकनीक पर भरोसा करने के बजाय स्थानीय क्षमताओं को विकसित करने और महत्वपूर्ण डेटा को घरेलू स्तर पर सुरक्षित रखने की आवश्यकता है। निष्कर्षतः, डिजिटल संप्रभुता केवल एक तकनीकी शब्द नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, जो दोनों देशों के बीच तकनीकी सेतु का काम करता है, इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले समय में ऑस्ट्रेलिया को अपनी संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए कड़े नीतिगत फैसले लेने होंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसकी डिजिटल अर्थव्यवस्था किसी बाहरी दबाव के कारण कभी भी बंद न हो।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण के आरोपों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
राजनीति

ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण के आरोपों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में प्रशासन ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय को अवैध बताते हुए ढहा दिया। दो नोटिस के बाद भी जवाब न मिलने पर यह कार्रवाई की गई।

19 जुल॰ 2026, 01:34 am
नशे के खिलाफ जनआंदोलन की पुकार: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पुलिस और समाज को दी बड़ी जिम्मेदारी
राजनीति

नशे के खिलाफ जनआंदोलन की पुकार: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पुलिस और समाज को दी बड़ी जिम्मेदारी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मधुबन में नशे के विरुद्ध प्रदेशव्यापी अभियान का आगाज करते हुए इसे मानवता को बचाने की लड़ाई बताया।

19 जुल॰ 2026, 12:34 am
डॉक्टरों से मारपीट का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना पार्षद की जमानत पर लगाई रोक, सरेंडर करने का आदेश
राजनीति

डॉक्टरों से मारपीट का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना पार्षद की जमानत पर लगाई रोक, सरेंडर करने का आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने डॉक्टरों के साथ मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत पर रोक लगा दी है और उन्हें 19 जुलाई तक पुलिस के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

19 जुल॰ 2026, 12:34 am