राजनीति
दतिया उपचुनाव: कांग्रेस ने दूर की अंदरूनी कलह, नाराज अवधेश नायक को मनाकर मैदान में उतारा
ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 12:34 pm
दतिया उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने नाराज नेता अवधेश नायक को मना लिया है। बीजेपी द्वारा नरोत्तम मिश्रा को टिकट न दिए जाने के बाद अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
मध्य प्रदेश की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले दतिया विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल करते हुए अपने वरिष्ठ और नाराज नेता अवधेश नायक को मना लिया है। पिछले कुछ दिनों से टिकट वितरण को लेकर नायक के बागी तेवर पार्टी के लिए चिंता का विषय बने हुए थे, लेकिन अब वह पूरी ताकत के साथ कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के समर्थन में उतर आए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भाजपा ने भी अपने दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को दरकिनार कर आशुतोष तिवारी पर दांव खेला है।
अवधेश नायक की नाराजगी उस समय सार्वजनिक हुई थी जब कांग्रेस ने उन्हें नजरअंदाज कर घनश्याम सिंह को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था। नायक को इस क्षेत्र में एक मजबूत जनाधार वाला नेता माना जाता है और उनकी नाराजगी का सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता था। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान और प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद नायक ने पार्टी के साथ बने रहने और एकजुट होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दतिया के राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि यदि नायक निर्दलीय मैदान में उतरते या निष्क्रिय रहते, तो कांग्रेस के लिए अपनी जीत सुनिश्चित करना लगभग असंभव हो जाता।
दूसरी ओर, भाजपा में भी स्थिति बहुत सहज नहीं है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा जैसे कद्दावर नेता को चुनावी मैदान से बाहर रखना एक बड़ा जोखिम माना जा रहा है। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को टिकट देकर एक नए समीकरण को साधने की कोशिश की है, लेकिन पार्टी के भीतर एक धड़ा अभी भी इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा है। दतिया का यह उपचुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं है, बल्कि यह आने वाले विधानसभा चुनावों और क्षेत्र में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए दतिया का यह चुनाव काफी मायने रखता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग सोशल मीडिया के माध्यम से इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। प्रवासी भारतीयों के लिए अपने गृह राज्य की राजनीति न केवल भावनात्मक जुड़ाव का विषय है, बल्कि यह उनके पैतृक क्षेत्रों में विकास और प्रशासनिक स्थिरता के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। कांग्रेस द्वारा अपने आंतरिक मतभेदों को सुलझाना यह दर्शाता है कि पार्टी इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवधेश नायक की वापसी से कांग्रेस का संगठन अब अधिक संगठित होकर काम कर सकेगा। नायक का जमीनी कार्यकर्ताओं पर अच्छा प्रभाव है और उनका सक्रिय होना घनश्याम सिंह के पक्ष में माहौल बनाने में सहायक सिद्ध होगा। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा का 'नया चेहरा' कार्ड कांग्रेस की 'एकजुटता' के सामने टिक पाता है या नहीं। दतिया की जनता का फैसला राज्य की भावी राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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