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दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट मांगी, निजी अस्पताल भेजने से इनकार

ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 12:34 am
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट मांगी, निजी अस्पताल भेजने से इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए तीन दिन में मेडिकल रिपोर्ट मांगी है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के प्रमुख पर्यावरण कार्यकर्ता और सुधारक सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और उनके स्थानांतरण से संबंधित एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने फिलहाल वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया है। इसके बजाय, न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे अगले तीन दिनों के भीतर वांगचुक की विस्तृत मेडिकल स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यह कानूनी घटनाक्रम तब सामने आया है जब सोनम वांगचुक और उनके लगभग 150 समर्थक लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर लेह से दिल्ली तक 'पदयात्रा' कर रहे थे। दिल्ली की सीमा पर पहुंचने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया था, जिसके बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं जताई गईं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि वांगचुक की स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए निजी अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने कहा कि जब तक मेडिकल रिपोर्ट में किसी आपात स्थिति का उल्लेख नहीं होता, तब तक मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता नहीं है। सोनम वांगचुक का यह आंदोलन मुख्य रूप से भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) के तहत लद्दाख को शामिल करने की मांग पर केंद्रित है। यह अनुसूची आदिवासी क्षेत्रों को स्वायत्तता प्रदान करती है और उनकी भूमि व संस्कृति की रक्षा करती है। वांगचुक का तर्क है कि लद्दाख का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र औद्योगिक शोषण की भेंट चढ़ सकता है, जिससे न केवल स्थानीय लोगों का जीवन बल्कि पूरे उत्तर भारत का जल सुरक्षा चक्र प्रभावित होगा। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय (Indian-Australian Community) के लिए लद्दाख का मुद्दा न केवल पर्यटन के लिहाज से बल्कि पर्यावरण और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में सक्रिय कई प्रवासी संगठन भारत में हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वांगचुक की लड़ाई का समर्थन करते रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई, जो अक्सर ट्रेकिंग और पर्यटन के लिए लद्दाख जाते हैं, वहां की बदलती राजनीतिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर गहरी नजर रखते हैं। अदालत ने अब मामले की अगली सुनवाई के लिए कुछ दिनों का समय दिया है, जब तक कि स्वास्थ्य विभाग अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश नहीं कर देता। तब तक वांगचुक की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी। इस मामले ने एक बार फिर केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच चल रहे गतिरोध को सुर्खियों में ला दिया है।
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