राजनीति
ट्रंप ने ईरान के परमाणु समझौते से हटने के फैसले को बताया 'बेमतलब', वैश्विक तनाव बढ़ने की आशंका
ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 02:34 am
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु समझौते को पूरी तरह त्यागने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा अंतरिम परमाणु समझौते की शेष प्रतिबद्धताओं को निलंबित करने की घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तेहरान का यह कदम उनके लिए 'कोई मायने नहीं रखता' (डजंट मैटर)। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी संकेतों में यह साफ किया गया है कि वॉशिंगटन का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और वह इस लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा।
ईरान ने हाल ही में घोषणा की थी कि वह 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) के तहत तय की गई अपनी सीमाओं का अब पालन नहीं करेगा। इसमें यूरेनियम संवर्धन की क्षमता, संवर्धन का स्तर और अनुसंधान एवं विकास की सीमाएं शामिल हैं। तेहरान का यह फैसला जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद उपजे सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में लिया गया है। हालांकि, ईरान ने यह भी कहा है कि यदि अमेरिका उसके ऊपर से प्रतिबंध हटाता है, तो वह इन फैसलों को पलटने के लिए तैयार है।
इस घटनाक्रम का प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी इसके गहरे आर्थिक निहितार्थ हो सकते हैं। वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता के कारण ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, जो व्यापार और यात्रा के लिए वैश्विक स्थिरता पर निर्भर है, के लिए यह एक चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो इससे न केवल ईंधन की लागत बढ़ेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किरायों पर भी असर पड़ सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस स्थिति पर गहरी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्री मैरिस पायने ने पहले ही सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार मौजूद हैं, और वहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था और ऑस्ट्रेलिया के साथ उसके व्यापारिक संबंधों पर पड़ता है।
ट्रंप प्रशासन ने अपनी 'मैक्सिमम प्रेशर' (अधिकतम दबाव) की नीति को जारी रखने का संकल्प दोहराया है। अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि ईरान के साथ पिछला समझौता त्रुटिपूर्ण था और इसमें तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को शामिल नहीं किया गया था। अब जबकि ईरान समझौते से पूरी तरह बाहर निकलने की राह पर है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक नए कूटनीतिक संकट की ओर बढ़ रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए चुनौती यह है कि वे किस तरह अपने ऊर्जा हितों और क्षेत्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखते हैं।
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