ऑस्ट्रेलिया
क्या 'ब्लिस' (Bliss) ट्रेड बदल सकता है आपकी सेवानिवृत्ति की तस्वीर? शेयर बाजार और सरकारी समर्थन का गहरा नाता
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:06 pm
क्या 'ब्लिस' यानी बड़े पैमाने पर सरकारी समर्थन शेयर बाजार को सुरक्षित बना रहा है? जानिए इसका आपकी सुपरएनुएशन और रिटायरमेंट पर क्या असर होगा।
आर्थिक जगत में इन दिनों 'ब्लिस' (BLISS - Big Lasting Institutional State Support) शब्द की काफी चर्चा हो रही है। यह अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि सरकारें और केंद्रीय बैंक उन वित्तीय संस्थानों को कभी डूबने नहीं देंगे जो अर्थव्यवस्था के लिए 'बेहद महत्वपूर्ण' (Too Big To Fail) माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थायी सरकारी समर्थन शेयर बाजार को एक ऐसी दिशा में ले जा रहा है जहाँ जोखिम कम और लाभ की संभावनाएं अधिक दिखती हैं। ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में, जहाँ भारतीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा अपनी मेहनत की कमाई सुपरएनुएशन (Superannuation) और शेयर बाजार में निवेश करता है, यह चर्चा और भी प्रासंगिक हो जाती है।
'ब्लिस' ट्रेड का सीधा अर्थ यह है कि जब भी बाजार में कोई बड़ी गिरावट आती है या वित्तीय संकट की स्थिति बनती है, तो सरकारें हस्तक्षेप करती हैं। चाहे वह 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट हो या 2020 की वैश्विक महामारी, सरकारी बेलआउट और कम ब्याज दरों ने बाजारों को टूटने से बचाया है। निवेशकों के लिए यह एक 'सेफ्टी नेट' की तरह काम करता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई पेशेवरों के लिए, जिनकी सेवानिवृत्ति की योजनाएं काफी हद तक उनके सुपर फंड्स के प्रदर्शन पर टिकी हैं, यह सरकारी हस्तक्षेप एक वरदान जैसा प्रतीत होता है।
हालांकि, इस सिक्के का दूसरा पहलू भी है जिसे अर्थशास्त्री 'नैतिक जोखिम' (Moral Hazard) कहते हैं। जब बाजार के खिलाड़ियों को पता होता है कि संकट के समय सरकार उन्हें बचा लेगी, तो वे अधिक जोखिम लेने से नहीं हिचकते। लंबे समय में यह बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकता है। भारतीय मूल के कई निवेशक जो पारंपरिक रूप से संपत्ति (Property) को सुरक्षित निवेश मानते रहे हैं, अब धीरे-धीरे ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाजार (ASX) की ओर रुख कर रहे हैं। उनके लिए 'ब्लिस' यह आश्वासन देता है कि उनका पोर्टफोलियो पूरी तरह शून्य नहीं होगा।
ऑस्ट्रेलियाई सुपरएनुएशन सिस्टम दुनिया के सबसे बड़े फंड्स में से एक है। इसमें जमा खरबों डॉलर सीधे तौर पर वैश्विक और स्थानीय बाजारों की स्थिरता पर निर्भर करते हैं। यदि 'ब्लिस' ट्रेड वास्तव में शेयर बाजार को एक 'वन-वे बेट' (ऐसी शर्त जिसमें जीत तय हो) बना देता है, तो लाखों ऑस्ट्रेलियाई भारतीयों के लिए एक आरामदायक सेवानिवृत्ति का सपना सच हो सकता है। लेकिन जानकारों की सलाह है कि निवेशकों को केवल सरकारी भरोसे पर नहीं रहना चाहिए। मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक अभी भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
निष्कर्ष के तौर पर, 'ब्लिस' ट्रेड ने निश्चित रूप से एक नई सुरक्षा की भावना पैदा की है। लेकिन एक सजग निवेशक के रूप में, यह समझना महत्वपूर्ण है कि सरकारी समर्थन की भी अपनी सीमाएं होती हैं। आपकी सेवानिवृत्ति की योजना केवल बाजार की तेजी पर नहीं, बल्कि एक संतुलित और विविधीकृत निवेश रणनीति पर आधारित होनी चाहिए। ICN24 की सलाह है कि अपने वित्तीय सलाहकार से बात करें और समझें कि 'ब्लिस' का यह दौर आपकी दीर्घकालिक बचत को कैसे प्रभावित कर सकता है।
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