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‘अब हिंदू माफ नहीं करेगा’: राम मंदिर में कथित ‘लूट’ के खिलाफ उद्धव ठाकरे का ‘रामरक्षा’ आंदोलन

ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 07:31 am
‘अब हिंदू माफ नहीं करेगा’: राम मंदिर में कथित ‘लूट’ के खिलाफ उद्धव ठाकरे का ‘रामरक्षा’ आंदोलन

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए 5 जुलाई से देशव्यापी 'रामरक्षा' आंदोलन की घोषणा की है।

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व के मुद्दे पर एक बार फिर घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में कथित 'लूट' और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए एक बड़े आंदोलन की घोषणा की है। ठाकरे ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भगवान राम के नाम पर की जा रही अनियमितताओं को अब हिंदू समाज माफ नहीं करेगा। इसी विरोध स्वरूप पार्टी आगामी 5 जुलाई को मुंबई के दादर इलाके से 'रामरक्षा' आंदोलन का बिगुल फूंकने जा रही है। पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस आंदोलन की शुरुआत दादर कबूतरखाना के सामने स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर से होगी। यह वही स्थान है जिसे शिवसेना की राजनीति का केंद्र माना जाता रहा है। 5 जुलाई को शाम 4 बजे होने वाले इस कार्यक्रम में 'विराट रामरक्षा पाठ' और 'महाआरती' का आयोजन किया जाएगा। उद्धव ठाकरे ने इस अवसर पर सभी राम भक्तों और हिंदुओं से बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि राम मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक है और इसके नाम पर किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार स्वीकार्य नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे का यह कदम हिंदुत्व के मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत करने की एक रणनीतिक कोशिश है। महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरणों के बदलने के बाद, ठाकरे गुट लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उनका हिंदुत्व भाजपा या शिंदे गुट के मुकाबले अधिक प्रखर और ईमानदार है। हाल के दिनों में राम मंदिर के बुनियादी ढांचे में कथित खामियों और बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की खबरों ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दिया है। शिवसेना (यूबीटी) इसी असंतोष को सड़क पर उतारने की तैयारी में है। उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल दादर तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी की योजना है कि 'रामरक्षा' आंदोलन की यह लौ महाराष्ट्र के हर गांव और तहसील तक फैले। शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता घर-घर जाकर मंदिर प्रशासन की कथित विफलताओं और 'मंदिर वहीं बनाएंगे' के नारे के पीछे की सच्चाई को जनता के सामने रखेंगे। आंदोलन का उद्देश्य न केवल सरकार पर दबाव बनाना है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले हिंदू मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करना भी है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए उदारतापूर्वक दान दिया था, वे भारत में मंदिर प्रबंधन और इससे जुड़े विवादों पर बारीकी से नजर रखते हैं। समुदाय के भीतर अक्सर इस बात पर चर्चा होती है कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए। ठाकरे का यह आह्वान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि राम मंदिर से वैश्विक हिंदू समुदाय की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
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