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बीबीसी में बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी: सैकड़ों पत्रकारों की जाएगी नौकरी, बजट में 10 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 11:31 pm

बीबीसी अपने समाचार प्रभाग में व्यापक कटौती की योजना बना रहा है, जिससे सैकड़ों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। लागत कम करने के लिए बजट में 10 फीसदी की कमी की जाएगी।
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित प्रसारकों में से एक, बीबीसी अपने समाचार प्रभाग में सैकड़ों नौकरियों की कटौती करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम संस्थान की उस व्यापक योजना का हिस्सा है जिसके तहत खर्चों में लगभग 10 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
आंतरिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बीबीसी के विभिन्न विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने परिचालन बजट में भारी कटौती करें। बताया जा रहा है कि इस पुनर्गठन प्रक्रिया के चलते कुल मिलाकर लगभग 2,000 पदों पर गाज गिर सकती है। इसमें संपादकीय टीम, तकनीकी कर्मचारी और प्रशासनिक स्टाफ शामिल हैं। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और लाइसेंस शुल्क से होने वाली आय में गिरावट के कारण बीबीसी वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीबीसी की वैश्विक सेवाओं और इसके दक्षिण एशियाई कवरेज का एक बड़ा दर्शक वर्ग यहाँ मौजूद है। बीबीसी हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की सेवाओं ने दशकों से प्रवासी भारतीयों को उनकी जड़ों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। न्यूज़ टीम के आकार में कमी होने से न केवल कवरेज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के प्रवाह पर भी इसका असर पड़ेगा।
बीबीसी प्रबंधन का तर्क है कि डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए 'डिजिटल-फर्स्ट' दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। इसके लिए पारंपरिक प्रसारण माध्यमों से हटकर निवेश को डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर मोड़ा जा रहा है। हालांकि, पत्रकार यूनियनों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर छंटनी से पत्रकारिता के मानकों और संस्थान की विश्वसनीयता को भारी नुकसान पहुँचेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीबीसी द्वारा किया जा रहा यह बदलाव वैश्विक मीडिया परिदृश्य में आ रहे बड़े बदलावों का संकेत है। ऑस्ट्रेलिया में भी सार्वजनिक सेवा प्रसारक (जैसे एबीसी) इसी तरह की वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहे हैं। बीबीसी की इस कटौती का असर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले द्विपक्षीय समाचार विनिमय पर भी पड़ सकता है, विशेष रूप से उन खोजी रिपोर्टों और विश्लेषणों पर जिनके लिए बीबीसी जाना जाता है।
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि किन विशिष्ट विभागों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल, बीबीसी के कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल है और कई वरिष्ठ पत्रकारों के संस्थान छोड़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं।
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