ऑस्ट्रेलिया
प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया का बढ़ता प्रभाव: फिजी के साथ नए सुरक्षा समझौते की तैयारी
ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 05:31 am
प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीस फिजी के साथ एक नए सुरक्षा समझौते के साथ अपने प्रशांत दौरे की शुरुआत कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग को सुदृढ़ करना है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीस प्रशांत द्वीप देशों के साथ संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं। उनके आगामी प्रशांत दौरे का मुख्य उद्देश्य फिजी के साथ एक व्यापक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करना है। यह कदम ऑस्ट्रेलिया की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना चाहता है और खुद को इस क्षेत्र के 'पसंदीदा सुरक्षा भागीदार' के रूप में स्थापित करना चाहता है।
इस समझौते के केंद्र में समुद्री सुरक्षा, पुलिस प्रशिक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। फिजी के साथ यह नई साझेदारी केवल रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच 'वुवाले पार्टनरशिप' (Vuvale Partnership) को और अधिक मजबूत बनाती है। फिजी के प्रधान मंत्री सितिवनी राबुका और एंथनी अल्बनीस के बीच होने वाली यह वार्ता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया पहले ही तुवालु और पापुआ न्यू गिनी के साथ इसी तरह के सुरक्षा समझौते कर चुका है, जो उसकी 'प्रशांत परिवार' (Pacific Family) की नीति को दर्शाता है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। फिजी में भारतीय मूल की एक विशाल आबादी बसती है, और ऑस्ट्रेलिया के फिजी के साथ मजबूत होते संबंधों का सीधा सकारात्मक असर वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों और उनके ऑस्ट्रेलिया स्थित रिश्तेदारों पर पड़ता है। इसके अलावा, भारत स्वयं 'इंडो-पैसिफिक' क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है और 'क्वाड' (Quad) के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर काम कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया की इस कूटनीतिक सक्रियता को भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के पूरक के रूप में देखा जा सकता है, जो एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वकालत करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा सोलोमन द्वीप समूह के साथ सुरक्षा समझौता करने के बाद से कैनबरा ने अपनी प्रशांत नीति में तेजी लाई है। ऑस्ट्रेलिया अब केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है। अल्बनीस का यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि यह पूरे प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की विश्वसनीयता को भी पुनर्स्थापित करेगा।
आगामी दिनों में, यह उम्मीद की जा रही है कि ऑस्ट्रेलिया अन्य प्रशांत देशों के साथ भी इसी तरह के सहयोग का विस्तार करेगा। इस पूरे घटनाक्रम पर सिडनी और मेलबर्न जैसे प्रमुख ऑस्ट्रेलियाई शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई व्यापारिक समुदाय की भी पैनी नजर है, क्योंकि प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता का सीधा संबंध सुरक्षित व्यापार मार्गों और निवेश के अवसरों से है।
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