लाइव
राजनीति
राजनीति

'आत्मवत् सर्वभूतेषु': भारतीय संस्कृति का वह मूल मंत्र जो वैश्विक शांति और एकता का मार्ग प्रशस्त करता है

ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 04:31 am
'आत्मवत् सर्वभूतेषु': भारतीय संस्कृति का वह मूल मंत्र जो वैश्विक शांति और एकता का मार्ग प्रशस्त करता है

भारतीय संस्कृति की जड़ें 'आत्मवत् सर्वभूतेषु' के सिद्धांत में निहित हैं, जो समस्त मानवता के कल्याण और सामूहिक चेतना पर बल देती है।

भारतीय संस्कृति और दर्शन के केंद्र में 'आत्मवत् सर्वभूतेषु' का महान मंत्र समाहित है, जिसका सरल अर्थ है—सभी जीवित प्राणियों को अपने समान देखना। यह केवल एक आध्यात्मिक विचार नहीं, बल्कि एक सामाजिक व्यवस्था का आधार है जो आधुनिक युग में और भी प्रासंगिक हो गया है। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया जैसे बहुसांस्कृतिक समाज में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह दर्शन एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। यह विचार हमें सिखाता है कि प्रत्येक व्यक्ति परमात्मा का एक अंश है और हर जीव में वही दैवीय शक्ति विराजमान है। जब हम दूसरों को अपने समान आदरणीय मानते हैं, तो द्वेष और घृणा के लिए कोई स्थान नहीं बचता। भारतीय मनीषा ने हमेशा से 'व्यष्टि' (व्यक्तिगत इकाई) के स्थान पर 'समष्टि' (संपूर्ण समाज) को प्राथमिकता दी है। पश्चिमी विचारधाराओं में अक्सर व्यक्तिवाद को महत्व दिया जाता है, लेकिन भारतीय संस्कृति यह स्पष्ट करती है कि हमारी व्यक्तिगत उन्नति समाज की उन्नति से अलग नहीं हो सकती। हमारी परंपरा हमें केवल अपने स्वार्थों की पूर्ति तक सीमित रहने की अनुमति नहीं देती, बल्कि समस्त मानवता के हितों के संवर्धन की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि भारतीय प्रवासी दुनिया के किसी भी कोने में रहें, वे वहां के स्थानीय समाज की सेवा और उत्थान में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोग इस प्राचीन दर्शन को अपने दैनिक जीवन और सामुदायिक कार्यों के माध्यम से जीवंत रखते हैं। चाहे वह संकट के समय 'लंगर' सेवा हो, रक्तदान शिविर हों या सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम, 'आत्मवत् सर्वभूतेषु' की भावना स्पष्ट झलकती है। जब कोई व्यक्ति सभी प्राणियों में परमात्मा को देखता है, तो उसके भीतर सेवा का भाव स्वतः ही जाग्रत हो जाता है। यह दृष्टिकोण न केवल व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करता है, बल्कि एक शांतिपूर्ण और संगठित समाज का निर्माण भी करता है। आज के समय में जब दुनिया संघर्षों और विभाजनकारी प्रवृत्तियों से जूझ रही है, भारतीय संस्कृति का यह मूल मंत्र एक समाधान के रूप में उभरता है। उपनिषदों की यह सीख कि 'जो मनुष्य सब प्राणियों में परमात्मा को देखता है, वह किसी से घृणा नहीं कर सकता', वैश्विक शांति की कुंजी है। मेलबर्न से लेकर सिडनी और पर्थ तक, भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय अपनी जड़ों से जुड़े रहकर न केवल अपनी विरासत का संरक्षण कर रहा है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के सामाजिक ताने-बाने को अधिक समावेशी और करुणामय बना रहा है। अंततः, भारतीय संस्कृति की यह अवधारणा हमें याद दिलाती है कि हमारी सच्ची पहचान हमारे संकीर्ण स्वार्थों में नहीं, बल्कि दूसरों के कल्याण में है। 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की कामना तभी सिद्ध हो सकती है जब हम 'आत्मवत् सर्वभूतेषु' के भाव को अपने आचरण में उतारें। यह मंत्र हमें एक ऐसे भविष्य की ओर ले जाता है जहां मानवता और प्रेम ही सर्वोपरि हैं।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

भारतीय सेना भर्ती 2026: हरियाणा में 20 जुलाई से शुरू होंगी भर्ती रैलियां, युवाओं में भारी उत्साह
राजनीति

भारतीय सेना भर्ती 2026: हरियाणा में 20 जुलाई से शुरू होंगी भर्ती रैलियां, युवाओं में भारी उत्साह

भारतीय सेना ने हरियाणा में 2026 के लिए भर्ती रैलियों के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। 20 जुलाई से शुरू होने वाली इन रैलियों में अग्निवीर योजना के तहत चयन किया जाएगा।

6 जुल॰ 2026, 05:31 am
PoJK में पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ता जनाक्रोश: 27वें दिन भी सड़कों पर उतरे हजारों लोग, बुनियादी सुविधाओं की मांग
राजनीति

PoJK में पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ता जनाक्रोश: 27वें दिन भी सड़कों पर उतरे हजारों लोग, बुनियादी सुविधाओं की मांग

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में 27 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। बिजली की बढ़ी कीमतों और आटे की कमी को लेकर जनता में भारी रोष है।

6 जुल॰ 2026, 03:31 am
सत्य हिंदी बुलेटिन: ईरान पर ट्रंप की धमकी और पीएम मोदी की चुप्पी पर सियासी घमासान, सोनम वांगचुक का आंदोलन जारी
राजनीति

सत्य हिंदी बुलेटिन: ईरान पर ट्रंप की धमकी और पीएम मोदी की चुप्पी पर सियासी घमासान, सोनम वांगचुक का आंदोलन जारी

विपक्ष ने डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई धमकी पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को घेरा, वहीं लद्दाख की स्वायत्तता के लिए सोनम वांगचुक का अनशन जारी है।

6 जुल॰ 2026, 02:31 am