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सीने में 12 गोलियां और हाथ में आखिरी चिट्ठी: टाइगर हिल के नायक सरमन सिंह सेंगर की अमर गाथा

ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 11:37 am
सीने में 12 गोलियां और हाथ में आखिरी चिट्ठी: टाइगर हिल के नायक सरमन सिंह सेंगर की अमर गाथा

कारगिल युद्ध के नायक हवलदार सरमन सिंह सेंगर की बहादुरी की कहानी, जिन्होंने 12 गोलियां लगने के बावजूद टाइगर हिल पर तिरंगा फहराया।

ग्वालियर। भारतीय सैन्य इतिहास में कारगिल युद्ध अदम्य साहस और बलिदान की ऐसी गाथा है जिसे सुनकर आज भी हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। इसी गौरवशाली इतिहास के एक चमकते सितारे थे हवलदार सरमन सिंह सेंगर। राजपूताना रेजीमेंट के इस जांबाज सैनिक ने न केवल दुर्गम चोटियों पर तिरंगा फहराया, बल्कि 12 गोलियां खाकर भी दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए। उनकी शहादत की कहानी आज भी ग्वालियर की गलियों और भारतीय सेना के गलियारों में जीवंत है। 1963 में उत्तर प्रदेश के जालौन में जन्मे सरमन सिंह का बचपन ग्वालियर में बीता। चार बहनों के इकलौते भाई होने के कारण वह पूरे परिवार के लाड़ले थे और प्यार से उन्हें 'लल्लू' बुलाया जाता था। लेकिन देशप्रेम का जज्बा ऐसा था कि 1980 में मात्र 17 साल की उम्र में वह घर पर बिना बताए सेना की भर्ती में शामिल होने मुरार कैंट पहुंच गए। उनकी जिद और जोश को देख अधिकारियों ने उन्हें सेना का हिस्सा बना लिया। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान, जब भारतीय सेना 15 से 20 हजार फीट की ऊंचाई पर पाकिस्तानी घुसपैठियों से लोहा ले रही थी, सरमन सिंह सेंगर की टुकड़ी को तोलोलिंग और टाइगर हिल फतह करने की जिम्मेदारी दी गई। तोलोलिंग के दौरान वह घायल हो गए थे, लेकिन टाइगर हिल जैसे महत्वपूर्ण मिशन से पीछे हटने के बजाय उन्होंने अपने जख्म छिपाए और मेडिकल फिटनेस पास कर अपनी 50 जवानों की टुकड़ी का नेतृत्व किया। 28 जून 1999 को टाइगर हिल के शिखर पर पहुंचते ही सरमन सिंह और उनके साथियों ने दुश्मन पर धावा बोल दिया। पीछे से हुए हमले में उन्होंने अकेले ही 7 से 8 पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया। भीषण गोलीबारी और बम धमाकों के बीच उन्होंने चोटी पर तिरंगा फहराया, लेकिन इसी दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में जब उनकी पार्थिव देह का परीक्षण हुआ, तो शरीर में 12 गोलियां मिलीं। उनकी शहादत से जुड़ी सबसे भावुक याद वह चिट्ठी है जो उनके घर तब पहुंची जब उनकी पार्थिव देह वहां रखी थी। उस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था, "मैं कुशल हूं, आप लोग अपना ध्यान रखना।" संचार साधनों के अभाव में युद्ध क्षेत्र से भेजी गई वह चिट्ठी उनकी शहादत के बाद मिली, जिसने आज भी परिवार की आंखों को नम कर रखा है। सरमन सिंह का जीवन और बलिदान भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय सहित दुनिया भर में रह रहे भारतीयों के लिए देशभक्ति की एक अमूल्य प्रेरणा है।
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