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क्विक कॉमर्स में जेप्टो की नई स्थिति और अमेरिका में एच-1बी वीजा नियमों में बड़ी राहत
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 02:00 pm
जेप्टो के आईपीओ फाइलिंग ने ब्लिंकिट और इंस्टामार्ट के साथ उसकी प्रतिस्पर्धा को स्पष्ट किया है, वहीं अमेरिका द्वारा एच-1बी वीजा नियमों में ढील भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी खबर है।
भारतीय स्टार्टअप ईकोसिस्टम में 'क्विक कॉमर्स' की जंग अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जेप्टो (Zepto) द्वारा हाल ही में दाखिल किए गए आईपीओ (IPO) दस्तावेजों ने बाजार में इसकी वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। वर्तमान में, जेप्टो खुद को जोमैटो के ब्लिंकिट (Blinkit) और स्विगी के इंस्टामार्ट (Instamart) के बीच एक मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, जेप्टो की परिचालन दक्षता और तेजी से बढ़ते रेवेन्यू ने निवेशकों का ध्यान खींचा है, हालांकि लाभप्रदता के मामले में अभी भी चुनौतियां बरकरार हैं।
जेप्टो की यह वृद्धि न केवल भारत के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर रह रहे भारतीय निवेशकों और अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे कई भारतीय निवेशक, जो भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों में गहरी रुचि रखते हैं, इस आईपीओ को एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जेप्टो की लिस्टिंग भारतीय स्टार्टअप बाजार में लिक्विडिटी और विश्वास को और मजबूत करेगी।
इधर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पेशेवरों के लिए एक और उत्साहजनक खबर सामने आई है। अमेरिका ने एच-1बी (H-1B) वीजा धारकों के लिए नियमों में कुछ ढील देने की घोषणा की है। यह राहत विशेष रूप से उन पेशेवरों के लिए है जिनकी वीजा अवधि समाप्त होने वाली थी या जो रोजगार बदलने की प्रक्रिया में थे। नए नियमों के तहत, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, जिससे कार्य वीजा के नवीनीकरण में लगने वाला समय कम होगा।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष प्रासंगिकता रखती है। सिडनी और मेलबर्न में स्थित कई आईटी पेशेवर और परामर्शदाता अक्सर ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच प्रोजेक्ट्स के लिए आवाजाही करते हैं। एच-1बी नियमों में यह लचीलापन न केवल व्यक्तिगत करियर के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भी राहत की बात है जो भारतीय प्रतिभाओं को वैश्विक स्तर पर तैनात करती हैं।
इन दो प्रमुख घटनाक्रमों—जेप्टो का उभरता बाजार दबदबा और एच-1बी वीजा में सुधार—ने वैश्विक व्यापार जगत में भारतीयों की बढ़ती धमक को एक बार फिर सिद्ध किया है। जहां एक ओर भारत का आंतरिक बाजार क्विक कॉमर्स जैसी सेवाओं के साथ परिपक्व हो रहा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय प्रतिभाओं को दुनिया भर में अधिक सुगम नीतियां मिल रही हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जेप्टो सार्वजनिक बाजार में अपनी धाक कैसे जमाता है और वीजा सुधारों का लॉन्ग-टर्म लाभ पेशेवरों को किस तरह मिलता है।
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