राजनीति
सपा में 'यादव बनाम कुर्मी' की जंग? ओमप्रकाश राजभर के तीखे सवालों से यूपी की राजनीति में उबाल
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 04:56 am

सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सपा के भीतर कुर्मी नेताओं की अनदेखी का आरोप लगाया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातीय समीकरणों को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर 'यादव बनाम गैर-यादव' के मुद्दे को हवा दी है। राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा हमला करते हुए सवाल उठाया है कि क्या पार्टी के भीतर कुर्मी और अन्य पिछड़ी जातियों के नेताओं को वह सम्मान मिल रहा है, जिसके वे हकदार हैं?
राजभर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अखिलेश यादव अपनी 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि सपा में केवल एक खास परिवार और समुदाय का ही वर्चस्व है, जबकि कुर्मी जैसे बड़े वोट बैंक वाले समुदायों के नेताओं को केवल वोट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी सत्ता की भागीदारी की बात आती है, तो गैर-यादव पिछड़ों को दरकिनार कर दिया जाता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राजभर का यह हमला सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश में कुर्मी समुदाय एक निर्णायक भूमिका निभाता है और भाजपा सहित एनडीए के अन्य घटक दल इस समुदाय को अपने पाले में बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। राजभर ने अखिलेश यादव से पूछा कि उनके संगठन में कितने कुर्मी नेताओं को शीर्ष पदों पर बैठाया गया है और पार्टी के भीतर उनकी आवाज को कितनी अहमियत दी जाती है।
सपा के भीतर इस तरह की चर्चाएं नई नहीं हैं, लेकिन एक पूर्व सहयोगी (राजभर पहले सपा के साथ गठबंधन में रह चुके हैं) द्वारा इस तरह के सवाल उठाए जाने से पार्टी की मुश्किल बढ़ सकती है। अखिलेश यादव अक्सर यह दावा करते रहे हैं कि उनकी पार्टी समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चल रही है, लेकिन राजभर के ये तीखे सवाल जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच संशय पैदा कर सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए भी यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोग अक्सर अपने गृह राज्य की राजनीति और वहां हो रहे सामाजिक बदलावों में गहरी रुचि रखते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले यूपी के प्रवासियों के बीच अक्सर राज्य के विकास और राजनीतिक स्थिरता पर चर्चाएं होती हैं। राजभर के इन बयानों का असर आने वाले उपचुनावों और भविष्य के गठबंधन पर भी पड़ सकता है, जिस पर प्रवासी भारतीयों की भी नजर बनी हुई है।
फिलहाल, समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। हालांकि, पार्टी के कुछ निचले स्तर के नेताओं ने इसे राजभर की 'पब्लिसिटी स्टंट' करार दिया है। लेकिन यह स्पष्ट है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यूपी में जातियों की यह बिसात और भी उलझने वाली है।
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