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पीएम मोदी की शीर्ष अधिकारियों के साथ लंबी बैठक: 'विकसित भारत' और शासन सुधारों पर दिया जोर
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 03:56 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीर्ष नौकरशाहों के साथ चार घंटे लंबी बैठक की, जिसमें गतिशक्ति, आत्मनिर्भरता और शासन सुधारों के जरिए 2047 तक भारत को विकसित बनाने का रोडमैप तैयार किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में भारत सरकार के शीर्ष सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण और लंबी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। लगभग चार घंटे तक चली इस 'मैराथन' बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक कुशल बनाना और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ाना था। बैठक के दौरान पीएम मोदी ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 'पीएम गतिशक्ति' (PM GatiShakti), आत्मनिर्भरता और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष बल दिया।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने नौकरशाहों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे सरकारी प्रक्रियाओं में जटिलताओं को कम करें और 'ईज ऑफ लिविंग' (सुगम जीवन) को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि सुधार केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने चाहिए। पीएम मोदी ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे पुरानी और अप्रासंगिक हो चुकी नियामक बाधाओं को हटाएं ताकि नवाचार और व्यापार को सुगम बनाया जा सके।
बैठक में 'पीएम गतिशक्ति' नेशनल मास्टर प्लान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत और समय दोनों में बचत होगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ही भारत की आर्थिक प्रगति की रीढ़ है और इसे वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने रक्षा, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीयों के लिए भारत में होने वाले ये प्रशासनिक सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों (ECTA) के बीच, भारत में नौकरशाही की प्रक्रियाओं का सरल होना सीधे तौर पर विदेशी निवेश और व्यापार को प्रभावित करता है। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय, जो भारत में रियल एस्टेट, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश करने का इच्छुक रहता है, के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि सरकार व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के प्रति गंभीर है।
अंत में, प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण पर चर्चा करते हुए कहा कि अगले 25 वर्ष देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सचिवों को 'होल ऑफ गवर्नमेंट' (Whole of Government) दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी, जहाँ सभी विभाग मिलकर एक साझा लक्ष्य की ओर काम करें। बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सरकार का ध्यान परिणाम-उन्मुख शासन (outcome-oriented governance) पर केंद्रित रहेगा, जिससे न केवल भारतीय नागरिकों बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा और निवेश क्षमता में भी वृद्धि होगी।
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