राजनीति
ब्रह्मोस मिसाइल की बढ़ती वैश्विक चमक: खाड़ी देशों और लातिन अमेरिका से आई नई पूछताछ
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 05:56 am
भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लिए वैश्विक मांग बढ़ रही है, जिसमें अब खाड़ी देशों और लातिन अमेरिका की नई पूछताछ शामिल है।
भारत की रक्षा निर्माण क्षमताएं अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम 'ब्रह्मोस' सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल में अब केवल दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों (Gulf countries) और लातिन अमेरिका (Latin America) की भी गहरी रुचि देखी जा रही है। यह विकास भारत के रक्षा निर्यात लक्ष्यों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि देश खुद को दुनिया के शीर्ष हथियार निर्यातकों की श्रेणी में स्थापित करने की ओर अग्रसर है।
रक्षा मंत्रालय और डीआरडीओ (DRDO) के सूत्रों के अनुसार, फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डॉलर के सफल सौदे के बाद, कई अन्य देशों ने भी इस उन्नत मिसाइल प्रणाली के प्रति उत्सुकता दिखाई है। वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ बातचीत पहले से ही अग्रिम चरणों में थी, लेकिन अब खाड़ी क्षेत्र के कुछ प्रमुख देशों और लातिन अमेरिका के कम से कम दो देशों ने अपनी सेनाओं को इस घातक प्रणाली से लैस करने की इच्छा जताई है। यह बदलाव भारत की 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल की सफलता का प्रमाण है।
ब्रह्मोस मिसाइल को इसकी गति और सटीकता के लिए जाना जाता है। यह ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज़ (2.8 मैक) चलती है, जिससे यह दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज मिसाइलों में से एक बन जाती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे जमीन, समुद्र और हवा, तीनों ही माध्यमों से दागा जा सकता है। यही कारण है कि यह उन देशों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन गया है जो अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा करना चाहते हैं या एक मजबूत निवारक क्षमता (deterrence) विकसित करना चाहते हैं।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के परिप्रेक्ष्य में, भारत की बढ़ती रक्षा निर्यात क्षमता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही क्वाड (Quad) के सदस्य हैं और एक 'स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक' के साझा दृष्टिकोण को साझा करते हैं। भारत का एक मजबूत रक्षा निर्यातक बनना इस क्षेत्र में रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ावा देता है। सिडनी और मेलबर्न में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह गौरव का विषय है कि भारत अब केवल हथियारों का आयातक नहीं रहा, बल्कि एक अत्याधुनिक तकनीकी प्रदाता के रूप में उभर रहा है।
भारत सरकार ने 2024-25 तक 35,000 करोड़ रुपये (लगभग 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के रक्षा निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। ब्रह्मोस के लिए बढ़ती ये नई पूछताछ इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। जैसे-जैसे वैश्विक भू-राजनीति बदल रही है, भारत की यह मिसाइल कूटनीति उसे वैश्विक मंच पर एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।
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