राजनीति
केएस ईश्वरप्पा का कांग्रेस पर तीखा हमला: कहा- 'जांच से डरना ही कांग्रेस के पुराने दुरुपयोग का प्रमाण है'
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 05:26 am
भाजपा नेता केएस ईश्वरप्पा ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि जांच रिपोर्टों से पार्टी की घबराहट उनकी पिछली गलतियों को उजागर करती है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री केएस ईश्वरप्पा ने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी पर कड़ा प्रहार किया है। एक हालिया बयान में ईश्वरप्पा ने दावा किया कि कांग्रेस का विशेष जांच रिपोर्ट (SIR) या किसी भी प्रकार की आधिकारिक जांच के प्रति डर यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि उन्होंने अपने शासनकाल के दौरान इन शक्तियों का जमकर दुरुपयोग किया था। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भ्रष्टाचार और जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर पहले से ही तनातनी चल रही है।
ईश्वरप्पा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जो लोग कानून का पालन करते हैं और जिन्होंने कुछ गलत नहीं किया है, उन्हें किसी भी जांच से डरने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक रूप से संस्थानों का उपयोग अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए करती रही है, और अब जब वही प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से उनके सामने आ रही है, तो वे घबरा रहे हैं। ईश्वरप्पा के अनुसार, यह 'चोर की दाढ़ी में तिनका' वाली स्थिति है, जहाँ पुरानी गलतियों के उजागर होने का डर कांग्रेस के बयानों में साफ झलकता है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम का असर केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर कन्नड़ मूल के प्रवासियों के बीच भी इसकी काफी चर्चा है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अक्सर भारत की प्रशासनिक शुचिता और राजनीतिक जवाबदेही पर नजर रखते हैं। प्रवासी भारतीयों के लिए भारत में सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति एक महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि इसका सीधा असर देश की छवि और विदेशी निवेश पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईश्वरप्पा का यह हमला आगामी चुनावों और मौजूदा प्रशासनिक जांचों के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण है। जहां कांग्रेस इन जांचों को 'राजनीतिक प्रतिशोध' बता रही है, वहीं भाजपा इसे 'सफाई अभियान' और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया के रूप में पेश कर रही है। कर्नाटक की राजनीति में भ्रष्टाचार के आरोपों का आदान-प्रदान नया नहीं है, लेकिन केएस ईश्वरप्पा जैसे कद्दावर नेता द्वारा 'दुरुपयोग के डर' की बात करना इस संघर्ष को और गहरा बनाता है।
अंततः, यह विवाद भारतीय लोकतंत्र में संस्थागत स्वतंत्रता और राजनीतिक नैतिकता के बीच के संतुलन को रेखांकित करता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्य अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि जांच एजेंसियों को किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए, ताकि आम जनता का विश्वास बना रहे। ईश्वरप्पा के इस बयान के बाद अब कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान और बढ़ने की उम्मीद है।
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