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2026 विश्व कप के दौरान प्रवासियों पर कार्रवाई की आशंका: ICE को मिली भारी फंडिंग से बढ़ी चिंता

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 02:30 am
2026 विश्व कप के दौरान प्रवासियों पर कार्रवाई की आशंका: ICE को मिली भारी फंडिंग से बढ़ी चिंता

2026 फीफा विश्व कप से पहले अमेरिकी आव्रजन प्रवर्तन (ICE) को अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है, जिससे प्रवासियों के बीच भय का माहौल है।

अमेरिका में 2026 फीफा विश्व कप की तैयारियों के बीच आव्रजन नीतियों को लेकर तनाव बढ़ गया है। हाल ही में अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) को अतिरिक्त बजटीय सहायता प्रदान की गई है, जिसके बाद मानवाधिकार संगठनों ने टूर्नामेंट के दौरान प्रवासियों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई और छापे मारे जाने की आशंका जताई है। नागरिक अधिकार समूहों का कहना है कि खेलों के इस महाकुंभ के दौरान सुरक्षा के नाम पर प्रवासियों को निशाना बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अतिरिक्त फंड का उपयोग निगरानी बढ़ाने और निर्वासन की प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए किया जा सकता है। यह घटनाक्रम केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक स्तर पर प्रवासी समुदायों पर पड़ रहा है। हालांकि यह मामला सीधे तौर पर अमेरिका से जुड़ा है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के दौरान अक्सर मेजबान देशों में आव्रजन और सुरक्षा कानूनों को सख्त कर दिया जाता है, जिससे वहां काम कर रहे या यात्रा कर रहे विदेशी नागरिकों, विशेषकर दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए कानूनी जटिलताएं बढ़ जाती हैं। विभिन्न नागरिक अधिकार संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि विश्व कप जैसे बड़े आयोजनों के समय 'क्लाइमेट ऑफ फियर' यानी डर का माहौल पैदा किया जा रहा है। उनका तर्क है कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आड़ में उन लोगों को परेशान किया जा सकता है जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं या जिनके वीजा की स्थिति अस्पष्ट है। आईकैन24 (ICN24) की रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रवासी भारतीय जो अमेरिका में बसने या वहां काम करने का सपना देखते हैं, इस नई फंडिंग और सख्त रुख से चिंतित हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के प्रवासियों के लिए यह स्थिति एक सबक की तरह है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में, जहां अक्सर बड़े अंतरराष्ट्रीय मैच और टूर्नामेंट आयोजित होते हैं, वहां भी सुरक्षा और आव्रजन नीतियों में बदलाव देखे जाते हैं। यदि अमेरिका में आव्रजन नियमों को लेकर इतनी कड़ाई बरती जा रही है, तो इसका असर भविष्य में ऑस्ट्रेलिया की अपनी नीतियों और वीजा जांच प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का सुझाव है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले भारतीयों को अपने सभी दस्तावेज दुरुस्त रखने चाहिए। विश्व कप के दौरान अमेरिका जाने की योजना बना रहे पर्यटकों और वहां रह रहे छात्रों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय कानूनों और आव्रजन अधिकारियों के अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। फिलहाल, मानवाधिकार समूह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि खेल भावना के बीच किसी भी समुदाय को अन्याय का शिकार न होना पड़े।
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