राजनीति
'हम अपनी धरती का इस्तेमाल नहीं होने देंगे': इराक ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका, ईरान युद्ध पर खींची 'लक्ष्मण रेखा'
ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 07:37 am

इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ हमले के लिए इराकी जमीन या हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बगदाद: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, इराक ने संयुक्त राज्य अमेरिका को एक कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने घोषणा की है कि उनका देश अमेरिका को पड़ोसी देशों, विशेष रूप से ईरान, के खिलाफ हमले करने के लिए अपनी धरती या हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध की संभावनाएं प्रबल होती दिख रही हैं।
प्रधानमंत्री अल-जैदी ने यह टिप्पणी इराक के वायु रक्षा कमान (Air Defence Command) के दौरे के दौरान की। उन्होंने अधिकारियों और सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि इराक की संप्रभुता 'अनुलंघनीय' है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बगदाद यह कभी स्वीकार नहीं करेगा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल क्षेत्रीय आक्रामकता के लिए एक 'लॉन्चपैड' के रूप में किया जाए। अल-जैदी का यह रुख सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन उम्मीदों को चुनौती देता है, जिनमें इराक को एक रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखा जा रहा था।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ ही हफ्ते पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अल-जैदी की मेजबानी की थी। उस समय ट्रंप ने इराकी नेता की जमकर प्रशंसा की थी और अमेरिका-इराक संबंधों में एक 'नए अध्याय' की शुरुआत की बात कही थी। हालांकि, अल-जैदी के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि इराक अपनी घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय स्थिरता को अमेरिकी हितों के ऊपर रखेगा। इराक में बड़ी संख्या में ऐसे राजनीतिक समूह हैं जो ईरान के करीबी माने जाते हैं, और सरकार के लिए देश के भीतर संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम काफी मायने रखता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के हजारों लोग न केवल वैश्विक शांति बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार का युद्ध सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों को प्रभावित करेगा, जिसका असर भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं और पेट्रोल की कीमतों पर पड़ेगा। इसके अलावा, खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी काम करते हैं; इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य अस्थिरता उनके रोजगार और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इराक का यह फैसला मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को बदल सकता है। यदि अमेरिका इराक के हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं कर पाता है, तो ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए उसे अन्य मार्गों और अधिक जटिल रणनीतियों पर निर्भर रहना होगा। फिलहाल, बगदाद के इस सख्त रुख ने ट्रंप प्रशासन को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और अधिक जटिल होता दिख रहा है।
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