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आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में आंतरिक कल्याण की आवश्यकता: तकनीक के साथ मानसिक शांति का संतुलन

ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 07:37 am
आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में आंतरिक कल्याण की आवश्यकता: तकनीक के साथ मानसिक शांति का संतुलन

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक में उन्नति के बावजूद, समग्र स्वास्थ्य के लिए आंतरिक शांति और मानसिक कल्याण अनिवार्य है।

पिछले दो दशकों में स्वास्थ्य विज्ञान की अवधारणाओं, दृष्टिकोणों और पद्धतियों में अभूतपूर्व परिवर्तन आए हैं। भारत और वैश्विक स्तर पर उच्च तकनीक (हाई-टेक) के आगमन ने चिकित्सा क्षेत्र को पूरी तरह से बदल दिया है। हालांकि, इन क्रांतिकारी बदलावों के बीच एक महत्वपूर्ण पहलू 'आंतरिक कल्याण' अक्सर पीछे छूट जाता है। राजयोगी ब्रह्मा कुमार निकुंज जी के विचारों के अनुसार, आधुनिक स्वास्थ्य सेवा को अब केवल शारीरिक लक्षणों के उपचार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे मन और आत्मा के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है। प्रवासी जीवन की आपाधापी, करियर का दबाव और सांस्कृतिक सामंजस्य बिठाने की जद्दोजहद अक्सर मानसिक तनाव का कारण बनती है। चिकित्सा जगत में यह स्वीकार किया जा रहा है कि रोग केवल शारीरिक नहीं होते, बल्कि उनका गहरा संबंध हमारे विचारों और भावनाओं से होता है। जब तक व्यक्ति आंतरिक रूप से शांत और संतुलित नहीं होगा, आधुनिक दवाएं और तकनीक केवल सतही राहत ही प्रदान कर पाएंगी। आधुनिक युग में 'स्वास्थ्य' की परिभाषा बदल रही है। पहले इसे केवल बीमारी की अनुपस्थिति माना जाता था, लेकिन अब इसमें शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण का समावेश है। स्वास्थ्य विज्ञान में आए बदलावों ने हमें यह समझने में मदद की है कि मन की स्थिति शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) पर सीधा प्रभाव डालती है। तनाव, क्रोध और चिंता जैसी नकारात्मक भावनाएं शारीरिक व्याधियों को जन्म देती हैं, जिन्हें 'साइकोसोमैटिक' या मनोदैहिक बीमारियां कहा जाता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के बीच हृदय रोग और मधुमेह जैसे जीवनशैली से जुड़े रोगों की दर अधिक देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बीमारियों के प्रबंधन में केवल आहार और व्यायाम पर्याप्त नहीं हैं। यहाँ 'आंतरिक उपचार' की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ध्यान (मेडिटेशन), सकारात्मक चिंतन और आध्यात्मिक जागरूकता व्यक्ति को वह शक्ति प्रदान करती है जिससे वह बीमारियों से बेहतर ढंग से लड़ सकता है। यह दृष्टिकोण पश्चिमी चिकित्सा पद्धति और भारतीय पारंपरिक ज्ञान के बीच एक सेतु का काम करता है। अंततः, आधुनिक स्वास्थ्य सेवा का भविष्य 'समग्र चिकित्सा' (Holistic Medicine) में निहित है। इसमें उन्नत तकनीक का उपयोग तो होगा ही, साथ ही रोगी के भावनात्मक और आध्यात्मिक कल्याण पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। स्वास्थ्य का अर्थ केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण जीवन जीना है। इसके लिए हमें अपने भीतर झांकना होगा और आंतरिक शांति को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा।
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