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हमास के निहत्थे होने के बाद भी गाजा में 'जवाबदेही' बनी रहेगी सबसे बड़ी चुनौती

ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 08:37 am
हमास के निहत्थे होने के बाद भी गाजा में 'जवाबदेही' बनी रहेगी सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा में स्थायी शांति के लिए केवल हमास का निहत्था होना काफी नहीं है, बल्कि कानूनी और नैतिक जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।

गाजा पट्टी में जारी संघर्ष और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस तेज हो गई है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा हमास के निरस्त्रीकरण (disarmament) को शांति की पहली शर्त मान रहा है, लेकिन कूटनीतिक और कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि असली चुनौती 'जवाबदेही' तय करने की होगी। इतिहास गवाह है कि जब तक किसी भी युद्ध के बाद कानूनी और नैतिक जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक सुलह और स्थायी शांति की संभावनाएं धूमिल बनी रहती हैं। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह मुद्दा केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में इस संघर्ष के सामाजिक प्रभावों को देखा जा रहा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, जो बहुसंस्कृतिवाद और कानून के शासन (rule of law) में विश्वास रखता है, इस बात पर करीब से नजर रख रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मानवीय संकट के बाद न्याय कैसे सुनिश्चित करता है। जानकारों का कहना है कि अगर केवल सैन्य समाधान पर जोर दिया गया और न्याय प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में हिंसा की पुनरावृत्ति का खतरा बना रहेगा। ऐतिहासिक संदर्भों को देखें तो दक्षिण अफ्रीका के 'सत्य और सुलह आयोग' या बाल्कन युद्धों के बाद की अंतरराष्ट्रीय अदालतों ने यह साबित किया है कि शांति के लिए केवल हथियारों का त्याग पर्याप्त नहीं है। गाजा के संदर्भ में, जवाबदेही का अर्थ व्यापक है। इसमें न केवल आतंकी कृत्यों के लिए दंड शामिल है, बल्कि उन मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच भी शामिल है जिन्होंने इस क्षेत्र को अस्थिर किया है। ऑस्ट्रेलिया में मौजूद भारतीय डायस्पोरा के बीच इस बात को लेकर एक आम सहमति है कि वैश्विक स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का समान रूप से लागू होना जरूरी है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भी बार-बार द्वि-राष्ट्र समाधान (two-state solution) की वकालत की है, लेकिन इसकी सफलता के लिए एक विश्वसनीय शासन और न्याय प्रणाली की आवश्यकता होगी। यदि हमास अपनी सैन्य शक्ति छोड़ भी देता है, तो भी वह राजनीतिक और सामाजिक शून्य कैसे भरा जाएगा और पिछली घटनाओं के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा, ये प्रश्न अभी अनुत्तरित हैं। शांति की ओर बढ़ने वाले किसी भी रोडमैप में मानवीय अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन को प्राथमिकता देनी होगी। अंततः, गाजा में शांति केवल युद्धविराम या निरस्त्रीकरण से नहीं आएगी। इसके लिए एक ऐसे तंत्र की आवश्यकता है जहां पीड़ितों को न्याय मिले और दोषियों को उनके कार्यों के प्रति जवाबदेह बनाया जाए। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और ऑस्ट्रेलिया की उदारवादी मूल्यों से जुड़ा है, न्याय की यह मांग एक न्यायसंगत विश्व व्यवस्था का आधार है।
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