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ऑस्ट्रेलिया में क्यों बढ़ रही हैं बिजली की दरें? क्या वाकई कम होगा आपका बिल?

ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 05:09 pm
ऑस्ट्रेलिया में क्यों बढ़ रही हैं बिजली की दरें? क्या वाकई कम होगा आपका बिल?

1 जुलाई से ऑस्ट्रेलिया में बिजली की कीमतों में गिरावट की उम्मीद है, लेकिन फिक्स्ड सप्लाई चार्ज बढ़ने से कई परिवारों का बजट बिगड़ सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई परिवारों के लिए बिजली के बिल एक बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं। संघीय सरकार और ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन ने उम्मीद जताई थी कि 1 जुलाई से बिजली की दरों में कमी आएगी, जिससे आम जनता को महंगाई से राहत मिलेगी। हालांकि, हालिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि यह बचत शायद सभी उपभोक्ताओं तक न पहुंच पाए। ऊर्जा कंपनियां अब एक नई रणनीति अपना रही हैं—वे बिजली के उपयोग की दर (usage rate) तो कम कर रही हैं, लेकिन 'फिक्स्ड सप्लाई चार्ज' (नियत आपूर्ति शुल्क) में वृद्धि कर रही हैं। आपूर्ति शुल्क वह दैनिक लागत है जो आप अपने घर को ग्रिड से जोड़े रखने के लिए चुकाते हैं, चाहे आप बिजली का उपयोग करें या नहीं। एबीसी (ABC) और ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, कई रिटेलर्स इस शुल्क को बढ़ा रहे हैं। इसका सीधा असर उन छोटे परिवारों या कम बिजली खपत करने वाले घरों पर पड़ेगा, जो कम इस्तेमाल के बावजूद अब अधिक भुगतान करेंगे। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जहां कई लोग बड़े साझा परिवारों में रहते हैं या छोटे व्यवसाय (जैसे किराना स्टोर और रेस्तरां) चलाते हैं, यह बदलाव बजट प्रबंधन को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली की कीमतों में इस अस्थिरता के पीछे कई कारण हैं। पहला कारण है पुराने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों का बंद होना और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की ओर संक्रमण। हालांकि सौर और पवन ऊर्जा लंबी अवधि में सस्ती है, लेकिन नए ट्रांसमिशन नेटवर्क बनाने की लागत वर्तमान में उपभोक्ताओं के बिलों में जोड़ी जा रही है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी घरेलू बाजार को प्रभावित किया है। 1 जुलाई से लागू होने वाले नए 'डिफ़ॉल्ट मार्केट ऑफ़र' (DMO) का उद्देश्य कीमतों पर लगाम लगाना है, लेकिन यह केवल एक संदर्भ बिंदु है। यदि आपकी कंपनी ने अपने फिक्स्ड चार्ज बढ़ा दिए हैं, तो सरकारी राहत का प्रभाव शून्य हो सकता है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे बड़े शहरों में रहने वाले प्रवासियों के लिए सलाह दी जा रही है कि वे अपनी वर्तमान योजना की तुलना अन्य प्रदाताओं से करें। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, बिलों में वास्तविक गिरावट अगले साल की शुरुआत तक ही दिखने की संभावना है जब थोक बाजार की कम कीमतें पूरी तरह से रिटेल सेक्टर में उतरेंगी। तब तक, उपभोक्ताओं को 'एनर्जी मेड ईजी' (Energy Made Easy) जैसी सरकारी वेबसाइटों का उपयोग करके अपने लिए सबसे सस्ता प्लान चुनना चाहिए। विशेष रूप से उन लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है जो 'स्टैंडिंग ऑफर' पर हैं, क्योंकि वे अक्सर सबसे महंगे होते हैं।
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