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कौन हैं नीरज शर्मा? अमेरिका में H-1B वीजा धोखाधड़ी के दोषी भारतीय मूल के सीईओ की नागरिकता होगी रद्द
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 05:00 pm

H-1B वीजा धोखाधड़ी मामले में दोषी पाए जाने के बाद भारतीय मूल के बिजनेसमैन नीरज शर्मा की अमेरिकी नागरिकता रद्द की जाएगी।
भारतीय मूल के व्यवसायी नीरज शर्मा इन दिनों अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं, लेकिन यह चर्चा उनकी किसी व्यावसायिक सफलता के लिए नहीं बल्कि उनकी अमेरिकी नागरिकता छीन लिए जाने के कारण हो रही है। अमेरिकी न्याय विभाग ने शर्मा के खिलाफ वि-प्राकृतिककरण (denaturalization) की कार्रवाई शुरू कर दी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने H-1B वीजा धोखाधड़ी में अपनी संलिप्तता छिपाकर और गलत जानकारी देकर अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी।
नीरज शर्मा उन 17 प्राकृतिक रूप से नागरिक बने व्यक्तियों में शामिल हैं, जिन पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के कड़े आव्रजन रुख के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांचकर्ताओं के अनुसार, शर्मा एक ऐसी योजना का हिस्सा थे जिसमें विदेशी कामगारों के लिए एच-1बी वीजा हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों और शेल कंपनियों का उपयोग किया गया था। इस धोखाधड़ी के माध्यम से न केवल अमेरिकी आव्रजन प्रणाली से समझौता किया गया, बल्कि उन योग्य उम्मीदवारों के अवसरों को भी कम किया गया जो कानूनी रूप से काम करने के इच्छुक थे।
अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि यदि शर्मा ने नागरिकता आवेदन के समय अपने आपराधिक कृत्यों का खुलासा किया होता, तो उन्हें कभी भी नागरिकता नहीं दी जाती। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो आव्रजन प्रक्रिया में धोखाधड़ी का सहारा लेते हैं। नागरिकता रद्द होने के बाद, शर्मा को न केवल अपना पासपोर्ट वापस करना होगा, बल्कि उन्हें देश से निकाले जाने (निर्वासन) की संभावना का भी सामना करना पड़ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में भी स्किल्ड माइग्रेशन और वीजा प्रायोजन को लेकर कड़े नियम हैं। हालांकि यह मामला अमेरिका का है, लेकिन यह दर्शाता है कि विकसित देश अब अपने आव्रजन रिकॉर्ड की पिछली तारीखों (retrospective) से जांच करने और धोखाधड़ी के मामलों में नागरिकता तक वापस लेने में संकोच नहीं कर रहे हैं। भारतीय मूल के पेशेवरों को सलाह दी जाती है कि वे वीजा और नागरिकता आवेदनों में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखें।
हाल के वर्षों में अमेरिका ने उन मामलों पर ध्यान केंद्रित किया है जहां नागरिकता हासिल करने के वर्षों बाद धोखाधड़ी के सबूत मिले हैं। नीरज शर्मा का मामला इसी 'क्लीन-अप' अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रवासियों के बीच वीजा अनुपालन और कानूनी प्रक्रियाओं की महत्ता को रेखांकित करता है।
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