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वंदे मातरम विधेयक 2026: राष्ट्रीय गीत के कानूनी संरक्षण के लिए संसद में संशोधन विधेयक लाएगी सरकार

ICN24 Newsroom 18 जुल॰ 2026, 02:34 am
वंदे मातरम विधेयक 2026: राष्ट्रीय गीत के कानूनी संरक्षण के लिए संसद में संशोधन विधेयक लाएगी सरकार

केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य 'वंदे मातरम' को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।

नई दिल्ली: भारत की केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र के दौरान देश के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाने जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार संसद में 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश करने की योजना बना रही है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वंदे मातरम' के प्रति किसी भी प्रकार के जानबूझकर किए गए अपमान या उसके गायन में बाधा डालने की स्थिति में कड़े दंड का प्रावधान करना है। वर्तमान में, भारत में 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971' लागू है, जो भारतीय राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान (जन गण मन) के अपमान को रोकने के लिए दंड निर्धारित करता है। हालांकि, अब तक राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को इस अधिनियम के तहत समान स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं था। नया विधेयक इसी कानूनी शून्यता को भरने का प्रयास करेगा, जिससे राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रगान के समान ही कानूनी दर्जा और सुरक्षा मिल सकेगी। राजनीतिक गलियारों में इस विधेयक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि यह कदम न केवल राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 'वंदे मातरम' भारतीय क्रांतिकारियों और आम जनता के लिए प्रेरणा का एक प्रमुख स्रोत रहा था। सरकार का तर्क है कि जिस गीत ने देश की आजादी की नींव रखने में मदद की, उसे कानूनी रूप से सुरक्षित रखना राष्ट्र का दायित्व है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में आयोजित होने वाले सामुदायिक कार्यक्रमों, जैसे कि भारत का स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोह, में 'वंदे मातरम' का गायन बड़े उत्साह के साथ किया जाता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के बीच इस गीत के प्रति गहरी भावनात्मक और सांस्कृतिक संबद्धता है। प्रवासी समुदाय अक्सर अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करता है, और भारत में होने वाले इस विधायी बदलाव का असर वैश्विक स्तर पर भारतीय पहचान के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है। प्रस्तावित विधेयक के मसौदे में उन कृत्यों को परिभाषित किया जाएगा जो अपमान की श्रेणी में आएंगे। इसमें गीत का मजाक उड़ाना, सार्वजनिक रूप से उसका अनादर करना या सामूहिक गायन को हिंसक तरीके से रोकना शामिल हो सकता है। दोषी पाए जाने पर कारावास या जुर्माने का प्रावधान होने की संभावना है। मानसून सत्र में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है, जहां पक्ष और विपक्ष दोनों ही राष्ट्रीय प्रतीकों की परिभाषा और उनके संरक्षण के दायरे पर अपनी राय रखेंगे। अंततः, 'वंदे मातरम विधेयक 2026' न केवल एक कानूनी दस्तावेज है, बल्कि यह भारत की एकता और अखंडता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी माना जा रहा है। आई.सी.एन.24 इस मामले पर संसद की कार्यवाही और समुदाय की प्रतिक्रियाओं पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।
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