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उज़्बेकिस्तान में होम लोन में भारी उछाल: पांच महीनों में 215 मिलियन डॉलर का ऋण वितरित
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 10:23 am
उज़्बेकिस्तान के वाणिज्यिक बैंकों ने 2024 के पहले पांच महीनों में बंधक ऋण में 2.6 ट्रिलियन सोम (लगभग $215 मिलियन) की वृद्धि दर्ज की है, जो आर्थिक सुधारों का संकेत है।
उज़्बेकिस्तान के बैंकिंग और रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, देश के वाणिज्यिक बैंकों ने चालू वर्ष के पहले पांच महीनों में बंधक ऋण (mortgage loans) के वितरण में भारी वृद्धि दर्ज की है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उज़्बेकिस्तान के बैंकों ने लगभग 2.6 ट्रिलियन सोम, जो करीब 215 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर है, का आवास ऋण प्रदान किया है। यह उछाल मध्य एशियाई राष्ट्र में चल रहे आर्थिक विविधीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास की बढ़ती गति को रेखांकित करता है।
उज़्बेकिस्तान सरकार द्वारा हाल के वर्षों में किए गए नीतिगत सुधारों ने बैंकिंग क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी और बाजार-उन्मुख बनाया है। पहले, जहां बैंकिंग गतिविधियां राज्य के नियंत्रण में अधिक थीं, वहीं अब निजी और वाणिज्यिक बैंकों की भूमिका आवास वित्तपोषण में तेजी से बढ़ रही है। निर्माण क्षेत्र में आई तेजी और शहरीकरण की बढ़ती मांग ने होम लोन की इस मांग को और अधिक बढ़ावा दिया है। विशेष रूप से ताशकंद और अन्य प्रमुख शहरों में नई आवासीय परियोजनाओं की बाढ़ आ गई है, जिससे मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए घर खरीदना आसान हो गया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों (Indian-Australians) के लिए यह समाचार एक व्यापक वैश्विक संदर्भ में महत्वपूर्ण है। भारतीय समुदाय, जो पारंपरिक रूप से निवेश के लिए सुरक्षित और बढ़ते बाजारों की तलाश में रहता है, अब मध्य एशिया जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी नज़र रख रहा है। उज़्बेकिस्तान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र, विशेषकर चिकित्सा क्षेत्र में, शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिससे इस देश के साथ भारत का सामाजिक और आर्थिक जुड़ाव बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में बैठे निवेशकों के लिए, उज़्बेकिस्तान का बढ़ता रियल एस्टेट बाजार भविष्य में विविधीकरण का एक संभावित केंद्र बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंधक ऋण में यह वृद्धि न केवल बैंकिंग क्षेत्र की तरलता (liquidity) को दर्शाती है, बल्कि उपभोक्ताओं के बीच भविष्य की आर्थिक स्थिरता को लेकर बढ़ते आत्मविश्वास का भी प्रतीक है। हालांकि, ब्याज दरों और मुद्रास्फीति की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन सरकार की सब्सिडी योजनाओं ने आम नागरिकों के लिए ऋण की पहुंच को सुगम बनाया है।
ऑस्ट्रेलिया के परिप्रेक्ष्य में देखें तो, जहां सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में उच्च ब्याज दरों के कारण रियल एस्टेट बाजार में कुछ सुस्ती देखी गई है, वहीं उज़्बेकिस्तान जैसे विकासशील बाजारों में ऋण की यह वृद्धि वैश्विक आर्थिक रुझानों में एक बड़ा विरोधाभास पेश करती है। ICN24 के पाठकों के लिए, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे उन सूक्ष्म बदलावों को समझने का अवसर है, जो आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश की दिशा तय करेंगे।
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