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सीबीएसई डिजिटल मार्किंग प्रणाली के भविष्य पर छात्रों और अभिभावकों से लेगा राय; तकनीकी खामियों के बाद समीक्षा शुरू
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 11:10 pm
सीबीएसई अपनी 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' प्रणाली की समीक्षा करेगा। 2027 की परीक्षाओं और कक्षा 10वीं में इसके विस्तार से पहले बोर्ड छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सुझाव मांगेगा।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपनी डिजिटल या 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) प्रणाली के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बोर्ड ने घोषणा की है कि वह कक्षा 12वीं की परीक्षाओं के लिए इस प्रणाली को जारी रखने और इसे कक्षा 10वीं तक विस्तार देने से पहले सभी प्रमुख हितधारकों—छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों—के साथ व्यापक परामर्श करेगा। यह निर्णय हाल ही में कक्षा 12वीं के मूल्यांकन के दौरान सामने आई तकनीकी समस्याओं और शिकायतों के बाद लिया गया है।
गौरतलब है कि सीबीएसई ने मूल्यांकन प्रक्रिया में गति और सटीकता लाने के उद्देश्य से डिजिटल मार्किंग की शुरुआत की थी। हालांकि, इसके पहले चरण में कई चुनौतियां देखने को मिलीं। शिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं ने शिकायत की थी कि उत्तर पुस्तिकाओं के स्कैनिंग में खामियां थीं, जिसके कारण कुछ उत्तर स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे थे। इसके अलावा, कुछ मामलों में उत्तरों के कुछ हिस्सों का मूल्यांकन ही नहीं हो पाया, जिससे छात्रों के अंकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ गई थी। इन विसंगतियों ने न केवल छात्रों में असुरक्षा की भावना पैदा की, बल्कि बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय और वहां के अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई प्रवासी भारतीय (NRI) परिवार अपने बच्चों को सीबीएसई पाठ्यक्रम के माध्यम से शिक्षा दिलाते हैं ताकि वे भविष्य में भारत या विदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पा सकें। ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए अक्सर सीबीएसई के अंकों को आधार माना जाता है। ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि छात्रों के अंतरराष्ट्रीय करियर और वीजा प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। पारदर्शिता की कमी भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई अभिभावकों के लिए चिंता का विषय रही है, जो इस समीक्षा प्रक्रिया को एक सकारात्मक सुधार के रूप में देख रहे हैं।
सीबीएसई के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य उन कमियों को दूर करना है जो हालिया परीक्षाओं के दौरान उजागर हुईं। बोर्ड यह सुनिश्चित करना चाहता है कि 2027 की परीक्षाओं तक एक त्रुटिहीन प्रणाली तैयार कर ली जाए। परामर्श प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों से फीडबैक लिया जाएगा कि सॉफ्टवेयर को और अधिक 'यूजर-फ्रेंडली' कैसे बनाया जाए। साथ ही, अभिभावकों और छात्रों से भी उनके अनुभव साझा करने को कहा जाएगा ताकि भविष्य में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पूर्ण निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन समय की मांग है, लेकिन इसे बिना पुख्ता तकनीकी ढांचे के लागू करना जोखिम भरा हो सकता है। बोर्ड का यह निर्णय कि वह जल्दबाजी में इसे कक्षा 10वीं पर लागू नहीं करेगा, एक स्वागत योग्य कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में होने वाले इन परामर्श सत्रों के परिणाम ही यह तय करेंगे कि क्या भारत का सबसे बड़ा शिक्षा बोर्ड डिजिटल मूल्यांकन के क्षेत्र में सफलतापूर्वक आगे बढ़ पाएगा या फिर उसे पारंपरिक पेन-और-पेपर मूल्यांकन की ओर वापस लौटना होगा।
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