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अंग प्रत्यारोपण में तमिलनाडु देश में सबसे आगे, लेकिन लंबी प्रतीक्षा सूची अब भी बड़ी चुनौती: डॉ. एन गोपालकृष्णन
ICN24 Newsroom 8 जुल॰ 2026, 01:31 pm

ट्रांसटैन के सदस्य सचिव डॉ. एन गोपालकृष्णन ने अंग विफलता को रोकने और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को सुधारने पर जोर दिया है।
चेन्नई: भारत में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में तमिलनाडु ने एक बार फिर अपनी अग्रणी भूमिका सिद्ध की है। हालांकि, इस सफलता के बावजूद राज्य में अंगों की प्रतीक्षा सूची लगातार लंबी होती जा रही है। तमिलनाडु अंग प्रत्यारोपण प्राधिकरण (TRANSTAN) के सदस्य सचिव डॉ. एन गोपालकृष्णन ने हाल ही में अंग विफलता को रोकने और इसे देश की सर्वोच्च सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। डॉ. गोपालकृष्णन के अनुसार, केवल प्रत्यारोपण करना ही समाधान नहीं है, बल्कि अंग विफलता के मूल कारणों पर प्रहार करना अधिक आवश्यक है।
तमिलनाडु ने अंगदान और सफल सर्जरी के मामले में देश के अन्य राज्यों के लिए एक बेंचमार्क स्थापित किया है। सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय और एक सुव्यवस्थित रजिस्ट्री प्रणाली ने इसे संभव बनाया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर कम होने के बजाय बढ़ रहा है। डॉ. गोपालकृष्णन ने बताया कि वर्तमान में हजारों मरीज किडनी, लिवर और हृदय प्रत्यारोपण के लिए कतार में हैं। इनमें से कई मरीजों के लिए समय पर अंग मिलना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होता है।
डॉ. गोपालकृष्णन ने 'डीटी नेक्स्ट' के साथ बातचीत में एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया—निवारक स्वास्थ्य सेवा (Preventive Healthcare)। उन्होंने कहा कि मधुमेह (Diabetes) और उच्च रक्तचाप (Hypertension) जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ अंग विफलता के सबसे बड़े कारण हैं। यदि इन बीमारियों का प्रारंभिक अवस्था में ही पता लगा लिया जाए और उचित प्रबंधन किया जाए, तो प्रत्यारोपण की आवश्यकता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में 'अंग विफलता की रोकथाम' को एक प्रमुख स्तंभ के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह मुद्दा अत्यधिक प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में अंगदान की दरें भारत की तुलना में भिन्न हैं, लेकिन वहां भी भारतीय मूल के लोगों में मधुमेह और हृदय रोगों की दर अधिक देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी भारतीयों को अपनी जीवनशैली के प्रति अधिक सचेत रहने की आवश्यकता है ताकि वे भविष्य में अंग विफलता जैसी गंभीर स्थितियों से बच सकें। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को देखते हुए, अंगदान के प्रति जागरूकता और निवारक उपायों को साझा करना दोनों देशों के समुदायों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
अंततः, तमिलनाडु का मॉडल यह सिखाता है कि इच्छाशक्ति और बेहतर बुनियादी ढांचे से हम जीवन बचा सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और रोगों की रोकथाम में ही निहित है। सरकार को अब 'उपचार' के साथ-साथ 'बचाव' पर भी भारी निवेश करने की आवश्यकता है ताकि अंगदान की प्रतीक्षा कर रहे हजारों लोगों के बोझ को कम किया जा सके।
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