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अमेरिकी कृषि सचिव रॉलिन्स ने की कर नीतियों की वकालत, खाद के घरेलू उत्पादन पर दिया जोर

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 11:01 am
अमेरिकी कृषि सचिव रॉलिन्स ने की कर नीतियों की वकालत, खाद के घरेलू उत्पादन पर दिया जोर

अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रॉलिन्स ने किसानों के लिए कर रियायतों का समर्थन किया है और विदेशी निर्भरता कम करने के लिए घरेलू खाद उत्पादन को बढ़ाने की अपील की है।

वाशिंगटन: अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की सचिव ब्रुक रॉलिन्स ने हाल ही में किसानों के लिए वर्तमान कर नीतियों का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने तर्क दिया है कि संघीय संपदा कर (estate taxes) में दी गई छूट ने देश भर के लाखों पारिवारिक फार्मों को अस्तित्व के संकट से बचाया है। रॉलिन्स के अनुसार, इन नीतियों के विस्तार से लगभग 20 लाख से अधिक कृषि परिवारों को राहत मिली है, जिससे कृषि क्षेत्र में स्थिरता बनी हुई है। रॉलिन्स ने 'वर्किंग फैमिलीज टैक्स कट्स' के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र की मजबूती सीधे तौर पर देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन कर लाभों को वापस लिया गया, तो अगली पीढ़ी के लिए खेती करना आर्थिक रूप से असंभव हो जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता बढ़ रही है और कृषि लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। कर नीतियों के अलावा, सचिव रॉलिन्स ने अमेरिका में उर्वरक (fertilizer) के घरेलू निर्माण को बढ़ाने की सख्त जरूरत पर बल दिया। ईरान और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण खाद की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही है। उन्होंने कहा कि विदेशी देशों पर निर्भरता कम करना न केवल आर्थिक बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मुद्दा है। जब तक खाद का उत्पादन घरेलू स्तर पर नहीं बढ़ाया जाता, तब तक किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा कृषि और संबंधित व्यवसायों से जुड़ा हुआ है। वैश्विक स्तर पर खाद की कीमतों में वृद्धि का असर ऑस्ट्रेलियाई किसानों पर भी पड़ता है। यदि अमेरिका जैसे बड़े कृषि प्रधान देश घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देते हैं, तो इससे वैश्विक बाजार में कीमतों को स्थिर करने में मदद मिल सकती है। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स जैसे राज्यों में भारतीय मूल के किसान अक्सर समान चुनौतियों का सामना करते हैं, विशेषकर बढ़ती इनपुट लागत और कर संबंधी जटिलताओं के मामले में। रॉलिन्स का यह संबोधन कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सरकारी सहायता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार और बुनियादी ढांचे में निवेश अनिवार्य है।
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