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अमेरिकी अदालत का सख्त रुख: ट्रंप प्रशासन द्वारा आदेश की अनदेखी पर USCIS को 24 घंटे का अल्टीमेटम

ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 09:31 am
अमेरिकी अदालत का सख्त रुख: ट्रंप प्रशासन द्वारा आदेश की अनदेखी पर USCIS को 24 घंटे का अल्टीमेटम

एक संघीय न्यायाधीश ने USCIS को 24 घंटे के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है, क्योंकि एजेंसी पर ग्रीन कार्ड और वर्क परमिट रोकने का आरोप है।

संयुक्त राज्य अमेरिका की एक संघीय अदालत ने आप्रवासन नीति को लेकर ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख पर नाराजगी व्यक्त करते हुए 'यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज' (USCIS) को एक सख्त अल्टीमेटम जारी किया है। न्यायाधीश ने एजेंसी को केवल 24 घंटे का समय दिया है ताकि वह यह साबित कर सके कि उसने अदालत के पिछले आदेश का पालन किया है। यह मामला उन 39 देशों के प्रवासियों से जुड़ा है जिनके ग्रीन कार्ड, वर्क परमिट और नागरिकता आवेदनों को प्रशासन द्वारा कथित तौर पर अभी भी रोका जा रहा है। यह कानूनी टकराव तब शुरू हुआ जब आप्रवासी अधिकार समूहों ने अदालत को सूचित किया कि एक सप्ताह पहले आए फैसले के बावजूद, सरकार अभी भी पुरानी नीतियों को लागू कर रही है जिन्हें अदालत ने पहले ही असंवैधानिक या अवैध करार दिया था। गुरुवार रात जारी किए गए इस दूसरे अदालती आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रशासनिक देरी या नीतिगत मतभेद अदालत की अवमानना का आधार नहीं बन सकते। भारतीय समुदाय के लिए, विशेष रूप से वे जो ऑस्ट्रेलिया में बस चुके हैं और जिनके परिवार के सदस्य अमेरिका में रह रहे हैं, यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के हजारों लोग अक्सर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच 'ट्रांस-पैसिफिक' पारिवारिक और व्यावसायिक संबंध रखते हैं। अमेरिका में वीजा प्रक्रियाओं में आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है जो वैश्विक स्तर पर फैले हुए हैं। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के पेशेवरों के लिए, जो अक्सर एच-1बी (H-1B) या एल-1 (L-1) वीजा के माध्यम से अमेरिका जाने की योजना बनाते हैं, यह अदालती हस्तक्षेप राहत की उम्मीद जगाता है। अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन ने जानबूझकर उन आवेदनों को अधर में लटका रखा है जो पहले से ही स्वीकृत होने चाहिए थे। न्यायाधीश ने चेतावनी दी है कि यदि एजेंसी अगले 24 घंटों के भीतर ठोस सबूत पेश नहीं करती कि उसने ब्लॉक किए गए आवेदनों पर कार्रवाई शुरू कर दी है, तो वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में जवाबदेह ठहराया जा सकता है। ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो, सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए अमेरिका एक प्रमुख गंतव्य बना हुआ है। अमेरिकी आव्रजन नीतियों में अनिश्चितता अक्सर वैश्विक स्तर पर प्रतिभाओं के पलायन को प्रभावित करती है। जानकारों का मानना है कि यदि अमेरिका में आव्रजन नियम और सख्त होते हैं, तो ऑस्ट्रेलिया भारतीय पेशेवरों के लिए पहली पसंद के रूप में और भी मजबूती से उभरेगा। हालांकि, जो लोग पहले से ही अमेरिकी प्रक्रिया का हिस्सा हैं, उनके लिए यह अदालती आदेश न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें USCIS की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या एजेंसी समय सीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करेगी या प्रशासन इस कानूनी लड़ाई को और आगे ले जाएगा, यह अगले कुछ घंटों में स्पष्ट हो जाएगा। यह मामला वैश्विक प्रवासन और कानून के शासन के बीच चल रहे संघर्ष का एक नया उदाहरण है।
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