राजनीति
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जन्मसिद्ध नागरिकता अधिकार बरकरार, ट्रंप की मांग खारिज
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 04:26 am

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) को बरकरार रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप की इसे खत्म करने की कोशिशों को खारिज कर दिया है।
वाशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में देश में जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) के अधिकार को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादास्पद प्रयास को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने संविधान के 14वें संशोधन की नई व्याख्या के जरिए इस अधिकार को समाप्त करने की मांग की थी। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला हर बच्चा स्वतः ही अमेरिकी नागरिकता का हकदार होगा, चाहे उसके माता-पिता की कानूनी स्थिति कुछ भी हो।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल अमेरिका के कानूनी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वहां रहने वाले लाखों प्रवासियों के लिए भी एक बड़ी राहत लेकर आया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान बार-बार यह तर्क दिया था कि गैर-नागरिकों और अवैध प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने इसे एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से लागू करने की योजना बनाई थी, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि 14वां संशोधन इस अधिकार की गारंटी देता है और इसे किसी प्रशासनिक आदेश से नहीं बदला जा सकता।
भारतीय समुदाय के लिए इस फैसले के गहरे मायने हैं। अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के पेशेवर, जिनमें बड़ी संख्या में एच-1बी (H-1B) वीजा धारक शामिल हैं, अक्सर ग्रीन कार्ड के लंबे इंतजार का सामना करते हैं। इस दौरान अमेरिका में पैदा हुए उनके बच्चों को मिलने वाली सुरक्षा इसी जन्मसिद्ध नागरिकता पर टिकी होती है। यदि ट्रंप की योजना सफल हो जाती, तो हजारों भारतीय परिवारों को अपने बच्चों के भविष्य और कानूनी पहचान को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो यहां के नियम अमेरिका से काफी अलग हैं। ऑस्ट्रेलिया में नागरिकता मुख्य रूप से 'जस सैंग्विनिस' (रक्त का अधिकार) पर आधारित है, जहां जन्म के समय कम से कम एक माता-पिता का नागरिक या स्थायी निवासी (PR) होना अनिवार्य है। ऐसे में अमेरिका का यह फैसला वैश्विक स्तर पर नागरिकता और मानवाधिकारों की बहस को एक नई दिशा देता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, जिनके परिवार के सदस्य अक्सर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रवास करते हैं, के लिए यह स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में आने वाले किसी भी प्रशासन के लिए इस संवैधानिक प्रावधान को चुनौती देना मुश्किल बना देगा। कोर्ट ने रेखांकित किया कि नागरिकता का यह सिद्धांत अमेरिकी लोकतंत्र की बुनियाद का हिस्सा है। इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि राजनीति के आधार पर संवैधानिक अधिकारों की मनमानी व्याख्या नहीं की जा सकती। जहाँ एक ओर ट्रंप समर्थक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का मुद्दा बता रहे थे, वहीं मानवाधिकार संगठनों ने इसे समानता और न्याय की जीत करार दिया है।
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