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ईरान युद्ध की आंच में खाली हुआ अमेरिका का मिसाइल भंडार; रिपोर्ट में भारी कमी का दावा

ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 04:37 am
ईरान युद्ध की आंच में खाली हुआ अमेरिका का मिसाइल भंडार; रिपोर्ट में भारी कमी का दावा

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण अमेरिका का मिसाइल भंडार गंभीर स्तर तक कम हो गया है। ATACMS और टोमाहॉक जैसी महत्वपूर्ण मिसाइलों की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है।

वाशिंगटन से आ रही हालिया रिपोर्ट्स ने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। रॉयटर्स की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, ईरान समर्थित समूहों के साथ जारी संघर्ष ने अमेरिकी सैन्य शस्त्रागार को खाली करने की कगार पर खड़ा कर दिया है। पिछले पांच महीनों से जारी सैन्य गतिविधियों के कारण अमेरिका ने अपनी सबसे उन्नत और सटीक मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। विशेष रूप से 'आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम' (ATACMS) और 'प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल' (PrSM) का भंडार लगभग समाप्ति की स्थिति में है। ये मिसाइलें अमेरिकी रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा हैं क्योंकि ये सुरक्षित दूरी से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक निशाना लगाने में सक्षम हैं। प्रत्येक मिसाइल की कीमत 10 लाख डॉलर (लगभग 8.4 करोड़ रुपये) से अधिक है, जो अमेरिकी खजाने पर भी भारी बोझ डाल रही है। इसके अलावा, अमेरिका की वैश्विक टोमाहॉक क्रूज मिसाइल आपूर्ति का लगभग आधा हिस्सा भी खर्च हो चुका है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर वैश्विक सुरक्षा समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिका एक प्रमुख शक्ति है। यदि उसके हथियारों का भंडार कम होता है, तो इसका सीधा असर चीन की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ गठबंधन (जैसे क्वाड) की प्रभावशीलता पर पड़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया, जो अमेरिका का एक करीबी रक्षा साझेदार है, के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा गारंटी अमेरिकी सैन्य तत्परता पर निर्भर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हथियारों की यह कमी केवल सैन्य चुनौती नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक उत्पादन की सीमाओं को भी दर्शाती है। आधुनिक युद्ध सामग्री को जल्दी से फिर से भरना आसान नहीं है, जिससे आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर हथियारों की होड़ और महंगाई बढ़ सकती है। भारतीय समुदाय जो अक्सर वैश्विक बाजार और ईंधन की कीमतों से प्रभावित होता है, उसके लिए इस संघर्ष का विस्तार आर्थिक अनिश्चितता का कारण बन सकता है। अमेरिका अब अपने रक्षा उत्पादन को गति देने की योजना बना रहा है, लेकिन इसके परिणाम आने में समय लगेगा।
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