राजनीति
CCTV की निगरानी में हो वार्ता: झारखंड के छात्रों की हेमंत सरकार को कड़ी चेतावनी, वार्ता पर फैसला कल
ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 03:37 am
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में धांधली को लेकर आंदोलनरत छात्रों ने सरकार के वार्ता प्रस्ताव पर सशर्त सहमति की बात कही है।
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन और उनमें कथित अनियमितताओं को लेकर उपजा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने हेमंत सोरेन सरकार द्वारा भेजे गए वार्ता के प्रस्ताव पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। छात्रों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि सरकार के साथ कोई बातचीत होती है, तो उसकी पूरी रिकॉर्डिंग सीसीटीवी की निगरानी में होनी चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
राजधानी रांची में पिछले कई दिनों से डटे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे बंद कमरों में होने वाली ऐसी किसी भी चर्चा के पक्ष में नहीं हैं, जिसका कोई ठोस और सार्वजनिक रिकॉर्ड न हो। आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांग है कि चयन प्रक्रियाओं में होने वाली देरी और पेपर लीक जैसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। छात्रों ने चेतावनी दी है कि वे अपने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों और वार्ता की शर्तों पर कल (शनिवार) अंतिम फैसला लेंगे।
झारखंड के इस छात्र आंदोलन की गूंज अब सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया में बसे प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच भी सुनाई दे रही है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले झारखंडी मूल के प्रवासियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के प्रति एकजुटता जताई है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे कई प्रवासियों का मानना है कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता की कमी न केवल युवाओं का भविष्य बर्बाद करती है, बल्कि उन परिवारों को भी गहरे आर्थिक संकट में डालती है जो अपने बच्चों की शिक्षा के लिए भारी निवेश करते हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार फिलहाल इस दबाव को कम करने की कोशिश में जुटी है। सरकार की ओर से एक वरिष्ठ अधिकारी को छात्रों के साथ समन्वय बिठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, छात्रों का भरोसा तंत्र पर से डगमगाया हुआ है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि पिछली वार्ताओं के परिणाम सकारात्मक नहीं रहे, इसलिए इस बार वे लिखित आश्वासन और डिजिटल साक्ष्य चाहते हैं।
आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो वे अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज करेंगे। कल होने वाली बैठक में यह तय होगा कि छात्रों का कौन सा समूह सरकार के प्रतिनिधियों से मिलेगा और क्या सरकार उनकी सीसीटीवी मॉनिटरिंग की शर्त को स्वीकार करेगी। फिलहाल, राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज है और युवाओं का यह आक्रोश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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