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अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप सरकार के H-1B वीजा शुल्क में भारी वृद्धि वाले फैसले को पलटने का किया स्वागत
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 03:31 pm

अमेरिकी अदालत ने एच-1बी वीजा पर प्रस्तावित 1 लाख डॉलर के भारी शुल्क को खारिज किया, भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए बड़ी राहत।
वाशिंगटन: अमेरिका की एक संघीय अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान प्रस्तावित किए गए 1,00,000 डॉलर के भारी-भरकम एच-1बी (H-1B) वीजा शुल्क को रद्द कर दिया है। इस न्यायिक फैसले का अमेरिकी सांसदों और आव्रजन विशेषज्ञों ने पुरजोर स्वागत किया है। आलोचकों का तर्क था कि इतना अधिक शुल्क विदेशी प्रतिभाओं को अमेरिका आने से रोकने और स्थानीय तकनीकी उद्योग को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से लगाया गया था।
अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने इस अदालती आदेश को कौशल-आधारित आव्रजन की जीत बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के दंडात्मक शुल्क से न केवल विदेशी कर्मचारी प्रभावित होते, बल्कि उन अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता जो वैश्विक प्रतिभाओं पर निर्भर हैं। भारतीय पेशेवरों के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एच-1बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय आईटी विशेषज्ञ ही होते हैं।
उल्लेखनीय है कि ट्रंप प्रशासन ने 'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन' नीति के तहत एच-1बी आवेदन शुल्क में ऐतिहासिक वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य उन कंपनियों पर वित्तीय बोझ डालना था जो विदेशी कामगारों को नौकरी पर रखती हैं। हालांकि, अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रशासन ने इस शुल्क वृद्धि को लागू करने में उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और यह तर्कहीन था।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी इस खबर के गहरे मायने हैं। अक्सर भारतीय पेशेवर ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका दोनों के वर्क वीजा विकल्पों पर विचार करते हैं। अमेरिका में वीजा नियमों के सख्त होने से ऑस्ट्रेलिया की ओर प्रतिभाओं का झुकाव बढ़ गया था, लेकिन इस नए अदालती फैसले के बाद वैश्विक तकनीकी प्रतिभाओं के लिए अमेरिका एक बार फिर आकर्षक विकल्प बन सकता है।
व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वह इस अदालती आदेश के खिलाफ अपील करने की तैयारी कर रहा है। आव्रजन अधिवक्ताओं का मानना है कि यदि यह अपील आगे बढ़ती है, तो यह कानूनी लड़ाई और लंबी खिंच सकती है। हालांकि, फिलहाल के लिए भारतीय तकनीकी फर्मों और वहां काम करने के इच्छुक युवाओं ने राहत की सांस ली है। जानकारों का कहना है कि एच-1बी वीजा प्रणाली में किसी भी तरह का बड़ा बदलाव न केवल अमेरिका की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है, बल्कि वैश्विक श्रम बाजार में भारत की स्थिति को भी सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
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