लाइव
ब्रेकिंग न्यूज़
ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग

अमेरिकी अदालत ने 'धार्मिक स्वतंत्रता आयोग' के खिलाफ दायर याचिका को किया खारिज, डोनाल्ड ट्रंप को मिली बड़ी राहत

ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 10:35 am
अमेरिकी अदालत ने 'धार्मिक स्वतंत्रता आयोग' के खिलाफ दायर याचिका को किया खारिज, डोनाल्ड ट्रंप को मिली बड़ी राहत

एक संघीय न्यायाधीश ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित धार्मिक स्वतंत्रता सलाहकार बोर्ड के खिलाफ दायर मुकदमे को खारिज कर दिया है, जिससे आयोग की रिपोर्ट जारी करने का रास्ता साफ हो गया है।

वाशिंगटन डीसी की एक संघीय अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्थापित 'धार्मिक स्वतंत्रता आयोग' (Religious Liberty Commission) के खिलाफ दायर एक बड़े मुकदमे को खारिज कर दिया है। 27 जुलाई को दिए गए इस फैसले में न्यायाधीश ने उस कानूनी चुनौती को पूरी तरह से नकार दिया, जिसका उद्देश्य आयोग की अंतिम रिपोर्ट के प्रकाशन पर रोक लगाना था। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में धार्मिक अधिकारों और सरकारी नीतियों के बीच संतुलन को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। इस मामले की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धार्मिक समुदायों के अधिकारों की रक्षा और उनके मुद्दों पर सरकार को सलाह देने के लिए इस आयोग का गठन किया था। हालांकि, विरोधियों का तर्क था कि यह आयोग पारदर्शिता के नियमों का उल्लंघन कर रहा है और इसका झुकाव विशेष विचारधाराओं की ओर है। वादी पक्ष ने अदालत से मांग की थी कि आयोग को अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करने से रोका जाए, लेकिन न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के पास इस कार्रवाई को रोकने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं हैं। सितंबर 2025 में वाशिंगटन स्थित 'म्यूजियम ऑफ द बाइबल' में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने इस आयोग के महत्व पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि धार्मिक स्वतंत्रता किसी भी लोकतंत्र की आधारशिला होती है और उनकी सरकार विश्वास आधारित समुदायों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस संबोधन के बाद से ही आयोग की गतिविधियों पर मानवाधिकार समूहों और कानूनविदों की नजर बनी हुई थी। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए इस खबर के गहरे मायने हैं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोग हिंदू, सिख, मुस्लिम और ईसाई जैसे विभिन्न धर्मों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कानून और अदालती फैसले अक्सर वैश्विक मानवाधिकार विमर्श को प्रभावित करते हैं। सिडनी और मेलबर्न में सक्रिय भारतीय समुदाय के नेताओं का मानना है कि इस तरह के आयोगों की कार्यप्रणाली और उन पर आने वाले अदालती फैसले यह तय करते हैं कि भविष्य में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक अधिकारों को वैश्विक मंच पर किस तरह देखा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुकदमे के खारिज होने से न केवल ट्रंप प्रशासन की धार्मिक नीतियों को मजबूती मिली है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक मिसाल भी पेश करता है। आलोचकों का कहना है कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल के लिए आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने और उसे जारी करने के लिए स्वतंत्र है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि अमेरिका में न्यायपालिका धार्मिक और राजनीतिक मामलों के टकराव के बीच किस तरह से प्रक्रियात्मक कानूनों की व्याख्या कर रही है।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

संजय दत्त जन्मदिन: जब नशे की लत ने मौत के मुहाने पर ला खड़ा किया था, एक घरेलू सहायक के आंसुओं ने बदली 'संजू बाबा' की तकदीर
ब्रेकिंगब्रेकिंग

संजय दत्त जन्मदिन: जब नशे की लत ने मौत के मुहाने पर ला खड़ा किया था, एक घरेलू सहायक के आंसुओं ने बदली 'संजू बाबा' की तकदीर

संजय दत्त के 65वें जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी का वह काला अध्याय, जब नशे के कारण वे मौत के करीब पहुंच गए थे और कैसे एक छोटी सी घटना ने उन्हें नई जिंदगी दी।

29 जुल॰ 2026, 12:35 pm
हैदराबाद: खजागुडा में कूड़े के अवैध ढेर और जहरीले धुएं से बढ़ा प्रदूषण, स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश
ब्रेकिंगब्रेकिंग

हैदराबाद: खजागुडा में कूड़े के अवैध ढेर और जहरीले धुएं से बढ़ा प्रदूषण, स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश

खजागुडा में मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के पीछे कचरा जलाने की घटनाओं से स्थानीय निवासी परेशान हैं, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

29 जुल॰ 2026, 11:35 am
लकिन कॉफी और डुओलिंगो की नई साझेदारी: शिक्षा और कैफीन का अनोखा संगम
ब्रेकिंगब्रेकिंग

लकिन कॉफी और डुओलिंगो की नई साझेदारी: शिक्षा और कैफीन का अनोखा संगम

लकिन कॉफी और डुओलिंगो ने छात्रों के लिए 'बैक-टू-स्कूल' अभियान के तहत हाथ मिलाया है, जिससे शिक्षा और दैनिक जीवन के बीच तालमेल बिठाने का प्रयास किया जाएगा।

29 जुल॰ 2026, 10:35 am