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अमेरिका में H-1B वीजा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, नया विधेयक पेश
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 01:31 pm

अमेरिकी कांग्रेस में पेश किए गए नए विधेयक का उद्देश्य H-1B वीजा प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव करना है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
वाशिंगटन: अमेरिका में एक रिपब्लिकन सांसद ने H-1B वीजा कार्यक्रम को पूरी तरह से बदलने के उद्देश्य से एक नया विधेयक पेश किया है। इस कदम का उद्देश्य विदेशी पेशेवरों के चयन की प्रक्रिया को अधिक कड़ा बनाना है, जिसका सीधा असर हजारों उच्च-कुशल भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है। यह प्रस्तावित कानून वर्तमान लॉटरी प्रणाली को समाप्त कर वेतन-आधारित चयन प्रक्रिया पर जोर देता है।
विधेयक के मुख्य प्रस्तावों के अनुसार, H-1B वीजा उन आवेदकों को प्राथमिकता देगा जिन्हें सबसे अधिक वेतन का प्रस्ताव दिया गया है। वर्तमान में, यह वीजा एक रैंडम लॉटरी सिस्टम के माध्यम से आवंटित किया जाता है, जिसकी अक्सर आलोचना की जाती रही है। आलोचकों का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था का उपयोग बड़ी कंपनियां सस्ते श्रम के लिए करती हैं। नया विधेयक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि केवल सबसे प्रतिभाशाली और उच्च वेतन पाने वाले पेशेवर ही अमेरिका में काम कर सकें।
भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि H-1B वीजा का सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय नागरिकों को मिलता है। विशेष रूप से आईटी और तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले भारतीयों के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो प्रवेश स्तर (entry-level) के पेशेवरों के लिए अमेरिका का रास्ता कठिन हो सकता है, क्योंकि उनका वेतन अनुभवी पेशेवरों की तुलना में कम होता है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के संदर्भ में, यह घटनाक्रम वैश्विक मोबिलिटी (global mobility) के प्रति बदलते नजरिए को दर्शाता है। जहां अमेरिका अपनी वीजा नीतियों को अधिक प्रतिबंधात्मक बना रहा है, वहीं ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में भारत के साथ 'मटुआ' (MATUWA) जैसे समझौतों के जरिए कुशल पेशेवरों के लिए अपने दरवाजे खोले हैं। अमेरिका की कठोर नीतियों के कारण कई भारतीय पेशेवर अब ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों को एक बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जहां पीआर (स्थायी निवास) की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधेयक का उद्देश्य अमेरिकी कामगारों के हितों की रक्षा करना और विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों के प्रभुत्व को कम करना है। हालांकि, तकनीकी उद्योग के दिग्गजों ने चेतावनी दी है कि प्रतिभाओं के आने पर रोक लगाने से अमेरिकी नवाचार (innovation) को नुकसान पहुंच सकता है। आने वाले हफ्तों में इस विधेयक पर अमेरिकी संसद में विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।
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