राजनीति
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सहयोगी देशों से आईसीसी छोड़ने का किया आह्वान, अंतरराष्ट्रीय अदालत को बताया ‘गैरकानूनी’
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 11:37 pm

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पश्चिमी देशों से अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) से अलग होने की अपील की है, इसे राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा बताया है।
वॉशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नई बहस छेड़ते हुए पश्चिमी गोलार्ध के सुरक्षा गठबंधन के सदस्य देशों से अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) से नाता तोड़ने का आग्रह किया है। हेगसेथ ने आईसीसी की वैधता पर कड़े सवाल उठाते हुए इसे एक 'गैरकानूनी' और 'दोषपूर्ण' संस्था करार दिया है, जो लोकतांत्रिक देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका अपनी वैश्विक सुरक्षा नीतियों को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है।
हेगसेथ ने अपने संबोधन में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि आईसीसी अब अपने मूल जनादेश से भटक कर उन क्षेत्रों में हस्तक्षेप कर रही है, जहां उसका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वैश्विक अदालत अब नशीले पदार्थों के तस्करी गिरोहों (ड्रग कार्टेल) के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियानों पर अपना अधिकार क्षेत्र स्थापित करने की कोशिश कर रही है। हेगसेथ के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं सेना की आंतरिक कार्रवाइयों और सुरक्षा अभियानों की समीक्षा करने लगेंगी, तो राष्ट्रों के लिए अपनी सीमाओं की रक्षा करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना असंभव हो जाएगा।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के दृष्टिकोण से यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय का एक सक्रिय सदस्य और 'रोम संविधि' (Rome Statute) का हस्ताक्षरकर्ता है, जबकि भारत ने कभी भी इस संधि को स्वीकार नहीं किया है। भारत का हमेशा से यह तर्क रहा है कि आईसीसी जैसे संस्थान अक्सर चुनिंदा तरीके से कार्रवाई करते हैं और विकासशील देशों की संप्रभुता का सम्मान नहीं करते। अमेरिका की इस नई आक्रामक नीति से ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए एक कूटनीतिक धर्मसंकट पैदा हो सकता है, जो एक तरफ अमेरिका के सुरक्षा सहयोगी हैं और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रबल समर्थक हैं।
हेगसेथ ने चेतावनी दी कि यदि पश्चिमी गठबंधन के देश आईसीसी से अलग नहीं होते हैं, तो वे अपनी न्यायिक स्वतंत्रता को दांव पर लगा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी देश की सेना को केवल अपनी राष्ट्रीय अदालतों और संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, न कि नीदरलैंड के हेग में बैठे विदेशी जजों के प्रति। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का मानना है कि आईसीसी का उपयोग अब राजनीतिक हथकंडे के रूप में किया जा रहा है, जिससे उन सैनिकों का मनोबल गिरता है जो खतरनाक ड्रग कार्टेल और सीमा पार अपराधों से लड़ रहे हैं।
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और यूरोपीय सहयोगियों के बीच हलचल तेज हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अधिक देश अमेरिका की इस अपील को स्वीकार करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रणाली का ढांचा कमजोर हो सकता है। हालांकि, हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने उन सहयोगियों का समर्थन करना जारी रखेगा जो अपनी संप्रभुता को प्राथमिकता देते हैं और वैश्विक संस्थानों के अनावश्यक दबाव को खारिज करते हैं।
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