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ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम: नागरिकता छीनने के अब तक के सबसे बड़े अभियान की शुरुआत
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 04:00 am

अमेरिकी न्याय विभाग ने 17 लोगों की नागरिकता रद्द करने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की है, जिसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा 'डीनैचुरलाइजेशन' अभियान माना जा रहा है।
वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्राप्त (Naturalized) अमेरिकियों की नागरिकता रद्द करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है। सोमवार को विभाग ने घोषणा की कि वह 17 व्यक्तियों की नागरिकता वापस लेने के लिए अदालती कार्यवाही शुरू कर रहा है। इसे अमेरिकी इतिहास में नागरिकता छीनने का अब तक का सबसे बड़ा समन्वित प्रयास माना जा रहा है।
न्याय विभाग के अनुसार, इस अभियान के तहत उन व्यक्तियों को लक्षित किया गया है जिन्होंने नागरिकता आवेदन के दौरान धोखाधड़ी की या गंभीर अपराधों में संलिप्त रहे। हालांकि विभाग का कहना है कि यह कदम कानून के शासन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक अधिकार समूहों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का तर्क है कि इस तरह के 'कोटा-आधारित' अभियान से नागरिकता का महत्व कम हो सकता है और यह एक अस्थायी दर्जे जैसा लगने लगेगा जिसे सरकार कभी भी वापस ले सकती है।
इस घटनाक्रम का प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की एक बड़ी आबादी रहती है, जिनमें से कई ने 'कॉन्फरल' (Conferral) प्रक्रिया के माध्यम से नागरिकता प्राप्त की है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया के कानून भी धोखाधड़ी के मामलों में नागरिकता रद्द करने की अनुमति देते हैं, लेकिन अमेरिका में अपनाई जा रही यह 'आक्रामक' रणनीति वैश्विक स्तर पर आव्रजन नीतियों में आते सख्त बदलावों की ओर संकेत करती है।
कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका का यह कदम उन प्रवासियों के बीच अनिश्चितता पैदा कर सकता है जो दशकों से वहां रह रहे हैं। यदि नागरिकता को 'अपरिवर्तनीय' अधिकार के बजाय एक 'विशेषाधिकार' के रूप में देखा जाने लगा, तो इससे लोकतांत्रिक मूल्यों पर असर पड़ेगा। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, यह समाचार विदेशी धरती पर नागरिकता के नियमों और आवेदन के समय दी गई जानकारियों की सटीकता के महत्व को रेखांकित करता है।
फिलहाल, जिन 17 लोगों पर कार्रवाई की जा रही है, उनमें से कई पर पूर्व में गंभीर आपराधिक दोष सिद्ध हो चुके हैं। न्याय विभाग का तर्क है कि ये लोग कभी नागरिकता के पात्र थे ही नहीं। आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई और तेज होने की संभावना है, क्योंकि मानवाधिकार संगठन इस सामूहिक कार्रवाई को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
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