लाइव
राजनीति
राजनीति

ट्रंप के पास विकल्प कम: क्या अब ईरान के खिलाफ कूटनीति बदलने का समय आ गया है?

ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 08:37 am
ट्रंप के पास विकल्प कम: क्या अब ईरान के खिलाफ कूटनीति बदलने का समय आ गया है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ईरान नीति अब गतिरोध पर पहुंच गई है। 1953 के तख्तापलट के ऐतिहासिक संदर्भों के साथ, अब तेहरान के प्रति दृष्टिकोण बदलने की मांग उठ रही है।

वाशिंगटन और तेहरान के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहाँ कूटनीतिक रास्ते सीमित होते दिख रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञ अभिजीत भट्टाचार्य के हालिया विश्लेषण के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन के पास अब ईरान को दबाने के विकल्प समाप्त हो रहे हैं। यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है जब वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन बदल रहा है और पुराने कूटनीतिक हथकंडे विफल साबित हो रहे हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो अमेरिका और ईरान के संबंधों में कड़वाहट की जड़ें बहुत गहरी हैं। सीआईए के अवर्गीकृत (declassified) दस्तावेजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 1953 में ईरान की लोकतांत्रिक सरकार को गिराने में अमेरिका की सीधी भूमिका थी। इस तख्तापलट का उद्देश्य ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखना था, जिसने वहां के जनमानस में अमेरिका के प्रति गहरे अविश्वास को जन्म दिया। हालांकि दुनिया इस सच से लंबे समय से वाकिफ थी, लेकिन अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर 2013 में ही इसे स्वीकार किया। यह समझना महत्वपूर्ण है कि 1953 का वह दौर कोरियाई युद्ध (1950-1953) के तुरंत बाद का था। शीत युद्ध के उस चरम काल में, अमेरिका ने संप्रभु राष्ट्रों की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप करने की जो नीति अपनाई, उसका खामियाजा आज भी भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में ट्रंप की 'अधिकतम दबाव' वाली नीति ने ईरान को झुकने के बजाय और अधिक आक्रामक बना दिया है। परमाणु समझौते से हटने और कड़े प्रतिबंध लगाने के बावजूद, तेहरान ने अपनी क्षेत्रीय पकड़ को मजबूत किया है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह मुद्दा रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भारत के लिए ईरान चाबहार बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशिया का प्रवेश द्वार है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के लिए मध्य पूर्व में स्थिरता ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का तर्क है कि अब समय आ गया है जब अमेरिका को अपनी 'टॉरमेंटिंग' (परेशान करने वाली) नीति को छोड़कर यथार्थवादी कूटनीति अपनानी चाहिए। इतिहास गवाह है कि जबरन सत्ता परिवर्तन की कोशिशों ने केवल अस्थिरता को जन्म दिया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का सम्मान करते हैं, इस क्षेत्र में शांति और संवाद के पक्षधर हैं। ट्रंप की वापसी की संभावनाओं के बीच, वैश्विक समुदाय यह देख रहा है कि क्या वाशिंगटन अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेकर एक नई राह चुनेगा।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

'हम अपनी धरती का इस्तेमाल नहीं होने देंगे': इराक ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका, ईरान युद्ध पर खींची 'लक्ष्मण रेखा'
राजनीति

'हम अपनी धरती का इस्तेमाल नहीं होने देंगे': इराक ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका, ईरान युद्ध पर खींची 'लक्ष्मण रेखा'

इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ हमले के लिए इराकी जमीन या हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

14 अग॰ 2026, 07:37 am
सुरक्षा सुधारों के बाद मेक्सिको के मिचोआकन में अमेरिका ने व्यापारिक गतिविधियां फिर शुरू कीं
राजनीति

सुरक्षा सुधारों के बाद मेक्सिको के मिचोआकन में अमेरिका ने व्यापारिक गतिविधियां फिर शुरू कीं

अमेरिका ने सुरक्षा चिंताओं के कारण अगस्त से ठप पड़ी अपनी व्यापारिक गतिविधियों को मेक्सिको के मिचोआकन में फिर से बहाल कर दिया है।

14 अग॰ 2026, 06:38 am
भीड़ नियंत्रण के लिए उत्तर-पूर्वी दिल्ली पुलिस की मॉक ड्रिल: दंगा रोकथाम की तैयारियों का लिया जायजा
राजनीति

भीड़ नियंत्रण के लिए उत्तर-पूर्वी दिल्ली पुलिस की मॉक ड्रिल: दंगा रोकथाम की तैयारियों का लिया जायजा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन और दंगों जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया, जिसमें पुलिस की मुस्तैदी को परखा गया।

14 अग॰ 2026, 06:37 am