ऑस्ट्रेलिया
ट्रंप का बड़ा दावा: 2020 चुनाव से पहले चीन ने हासिल किए 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं के रिकॉर्ड
ICN24 Newsroom 18 जुल॰ 2026, 05:33 pm
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले चीन ने करोड़ों अमेरिकियों का डेटा हासिल कर लिया था।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चुनावी अखंडता और विदेशी हस्तक्षेप का मुद्दा गरमा दिया है। एक हालिया संबोधन के दौरान, ट्रंप ने दावा किया कि 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले चीन ने लगभग 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की फाइलों और व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच हासिल कर ली थी। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में तत्काल कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किए हैं, लेकिन उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और साइबर सुरक्षा के गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका एक और महत्वपूर्ण चुनावी वर्ष की दहलीज पर खड़ा है। उनके अनुसार, यह डेटा ब्रीच न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन था, बल्कि इसने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए। गौरतलब है कि 2020 के चुनाव के बाद से ही ट्रंप और उनके समर्थक लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव परिणामों में बाहरी हस्तक्षेप हुआ था, जबकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचा सुरक्षा एजेंसी (CISA) ने उस समय इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि 2020 का चुनाव अमेरिकी इतिहास में सबसे सुरक्षित था।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया खुद भी पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर साइबर हमलों और विदेशी हस्तक्षेप के प्रयासों का सामना करता रहा है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई पेशेवर अक्सर तकनीकी और साइबर सुरक्षा क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जहाँ डेटा गोपनीयता एक प्रमुख विषय है। ट्रंप के इन दावों का प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है; यह क्वाड (QUAD) देशों—भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान—के बीच सुरक्षा सहयोग और चीन के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों को भी प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों से लोकतंत्र में जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है। ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में भी विदेशी हस्तक्षेप कानून (Foreign Interference Laws) को काफी सख्त बनाया गया है, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं को बाहरी प्रभावों से बचाया जा सके। भारतीय समुदाय, जो ऑस्ट्रेलिया की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भागीदारी करता है, के लिए चुनावी पारदर्शिता और डिजिटल सुरक्षा सबसे ऊपर है।
अंततः, ट्रंप के ये आरोप आगामी चुनाव अभियान का एक बड़ा हिस्सा बन सकते हैं। जहां उनके समर्थक इसे सच्चाई को उजागर करने वाला कदम मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे चुनाव से पहले भ्रम पैदा करने की कोशिश बता रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिकी जांच एजेंसियां इन दावों पर कोई नई रिपोर्ट जारी करती हैं या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाता है।
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