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ट्रम्प प्रशासन की नई योजना: ईरान और अन्य देशों के प्रवासियों को मध्य अफ़्रीकी गणराज्य भेजने की तैयारी
ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 03:01 pm

ट्रम्प प्रशासन ईरानी और अन्य प्रवासियों को मध्य अफ़्रीकी गणराज्य भेजने के लिए एक 'थर्ड कंट्री डील' पर विचार कर रहा है, जिससे मानवाधिकारों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
वाशिंगटन से आ रही खबरों के अनुसार, नवनिर्वाचित डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन एक विवादास्पद आव्रजन योजना पर काम कर रहा है। इस योजना के तहत, अमेरिका में सुरक्षा और शरण की मांग करने वाले ईरानियों और अन्य देशों के प्रवासियों को मध्य अफ़्रीकी गणराज्य (CAR) में निर्वासित करने की तैयारी है। यह कदम एक 'थर्ड कंट्री' समझौते के तहत उठाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य अमेरिका की सीमाओं पर दबाव कम करना और अवैध प्रवास को हतोत्साहित करना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्तावित समझौता उन प्रवासियों पर लागू होगा जिन्हें अमेरिका में रहने की अनुमति नहीं मिली है या जो सुरक्षा आदेशों के तहत हैं। मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, जो लंबे समय से आंतरिक संघर्ष और अस्थिरता से जूझ रहा है, को इस उद्देश्य के लिए चुना जाना मानवाधिकार संगठनों के बीच चिंता का विषय बन गया है। आलोचकों का तर्क है कि प्रवासियों को एक ऐसे देश में भेजना जहाँ पहले से ही मानवीय संकट और सुरक्षा की कमी है, अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और प्रवासी नागरिकों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया ने भी अतीत में 'पैसिफिक सॉल्यूशन' जैसी नीतियों के तहत प्रवासियों को नौरु और मनुस द्वीप जैसे बाहरी केंद्रों पर भेजा है। ट्रम्प प्रशासन की यह नई नीति वैश्विक स्तर पर शरण चाहने वालों के प्रति सख्त होते रुख को दर्शाती है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो अन्य पश्चिमी देश भी इसी तरह के आउटसोर्सिंग मॉडल को अपना सकते हैं, जिसका असर भारतीय मूल के उन लोगों पर भी पड़ सकता है जो अन्य देशों के माध्यम से प्रवास की कोशिश करते हैं।
मानवाधिकार समूहों ने इस योजना को 'अमानवीय' करार दिया है। उनका कहना है कि मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में बुनियादी ढांचों की भारी कमी है और वहां भेजे गए प्रवासियों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होगी। विशेष रूप से ईरानी प्रवासियों के लिए, जिन्हें अक्सर राजनीतिक कारणों से सुरक्षा की आवश्यकता होती है, यह कदम उनके जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि इस तरह के समझौते मानव तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने और सीमा नियंत्रण को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, अभी तक इस समझौते के वित्तीय पहलुओं और कानूनी वैधता पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। आने वाले हफ्तों में इस नीति के लागू होने की प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर दुनिया भर की नजरें टिकी होंगी।
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