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गुजरात के अमरेली में दिल दहला देने वाली घटना: शेरनी ने 7 साल के मासूम को उतारा मौत के घाट
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 07:01 am
अमरेली के घंटियान गांव में एक शेरनी ने प्रवासी मजदूर के सात वर्षीय बेटे पर हमला कर उसे मार डाला। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी रोष है।
गुजरात के अमरेली जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां सावरकुंडला तालुका के घंटियान गांव में एक शेरनी ने सात साल के मासूम बच्चे को अपना शिकार बना लिया। मृतक बच्चा एक प्रवासी मजदूर का बेटा था, जो काम के सिलसिले में अपने परिवार के साथ वहां रह रहा था। इस दुखद घटना ने न केवल स्थानीय निवासियों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि वन्यजीव प्रबंधन और मानवीय सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब बच्चा अपने घर के पास खेल रहा था। अचानक झाड़ियों से निकलकर एक शेरनी ने उस पर हमला कर दिया और उसे घसीटते हुए पास के खेतों में ले गई। जब तक परिवार और ग्रामीण मदद के लिए दौड़ते, तब तक शेरनी ने बच्चे को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। बाद में बच्चे का शव बरामद किया गया, जिससे इलाके में मातम और डर का माहौल व्याप्त हो गया।
इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और वन विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस क्षेत्र में शेरों की आवाजाही अक्सर देखी जाती है, लेकिन वन विभाग की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि आदमखोर हो चुकी शेरनी को तुरंत पकड़ा जाए और क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए। प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए शव को उठाने से भी मना कर दिया था, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला।
वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इलाके में पिंजरे लगाए। कड़ी मशक्कत के बाद विभाग ने उस शेरनी और उसके दो शावकों को सफलतापूर्वक पकड़ लिया है। अधिकारियों का कहना है कि शेरनी के व्यवहार का विश्लेषण किया जाएगा ताकि यह समझा जा सके कि हमला किन परिस्थितियों में हुआ। फिलहाल, पकड़े गए जानवरों को वन विभाग के रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है।
यह घटना उन प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा को भी उजागर करती है जो अक्सर खुले खेतों या अस्थायी आवासों में रहने को मजबूर होते हैं। गुजरात के गिर सोमनाथ और अमरेली जैसे क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी ऐसी खबरें चिंता का विषय होती हैं, क्योंकि उनमें से कई लोगों के परिवार आज भी भारत के ग्रामीण इलाकों में कृषि और मजदूरी से जुड़े हैं।
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