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आज का पंचांग 13 जुलाई 2026: सोमवार और चतुर्दशी का दुर्लभ संयोग, जानें शिव पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व
ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 09:31 am

13 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी और सोमवार का विशेष योग बन रहा है। शाम 6:01 के बाद अमावस्या शुरू होगी, जो पितृ कार्य के लिए शुभ है।
हिन्दू धर्मग्रंथों और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 13 जुलाई 2026 का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। सोमवार होने के कारण यह दिन महादेव की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर लेकर आया है। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि आज शाम 6:01 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके तत्काल बाद अमावस्या तिथि का आरंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं में चतुर्दशी को 'शिवरात्रि' के समान फल देने वाला माना जाता है, और जब यह सोमवार को पड़ती है, तो इसका महत्व द्विगुणित हो जाता है।
आज के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने का विशेष विधान है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग स्थानीय समयानुसार सूर्योदय के बाद शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना कर सकते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी स्वयं भगवान शिव हैं, इसलिए इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप और ओम नमः शिवाय का संकीर्तन मानसिक शांति और आरोग्य प्रदान करने वाला माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन ग्रहों की स्थिति भक्तों के लिए अनुकूल बनी हुई है, जो संकल्प शक्ति को मजबूती प्रदान करेगी।
शाम 6:01 बजे के बाद अमावस्या तिथि के शुरू होने से यह समय पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए भी श्रेष्ठ हो जाता है। आषाढ़ अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीय, जो भौतिक रूप से गंगा या अन्य पवित्र नदियों तक नहीं पहुँच सकते, वे जल में तिल मिलाकर स्नान कर पितरों का स्मरण कर सकते हैं। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या सामर्थ्य अनुसार दान देना इस दिन के पुण्य को बढ़ाता है। सोमवार और अमावस्या का यह संगम 'सोमवती अमावस्या' की पूर्व संध्या के रूप में भी देखा जा रहा है।
ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो आज राहुकाल और अन्य अशुभ समय का ध्यान रखना अनिवार्य है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत या महत्वपूर्ण अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पहले शुभ चौघड़िया और अभिजीत मुहूर्त का चयन करना लाभकारी रहेगा। पंचांग के अनुसार, चंद्रमा की स्थिति और नक्षत्रों का प्रभाव आज संवेदनशीलता और भक्ति का संचार करेगा। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय समयानुसार चंद्रोदय और तिथि के परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए अपनी धार्मिक गतिविधियों का नियोजन करें।
उपरोक्त धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ, आज के दिन सात्विक आहार और ध्यान का अभ्यास करना विशेष रूप से अनुशंसित है। जो लोग व्रत रखना चाहते हैं, वे सूर्यास्त तक उपवास रखकर शाम को शिव पूजा के उपरांत फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। यह दिन न केवल व्यक्तिगत शुद्धि का है, बल्कि सामुदायिक सद्भाव और सेवा कार्यों के माध्यम से मानवता की सेवा का भी संदेश देता है।
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