राजनीति
टीएमसी में बड़ी बगावत: बागी गुट का NPCI में विलय, एनडीए को समर्थन से बंगाल की राजनीति में भूचाल
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 05:01 am

तृणमूल कांग्रेस में बड़ी टूट के बाद बागी गुट ने राष्ट्रवादी पीपुल्स कांग्रेस ऑफ इंडिया (NPCI) में विलय कर लिया है और केंद्र में NDA को समर्थन देने का ऐलान किया है।
नई दिल्ली: अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की आग रविवार को एक बड़े राजनीतिक विस्फोट में बदल गई। पार्टी के एक प्रभावशाली गुट ने आधिकारिक तौर पर बगावत की घोषणा करते हुए राष्ट्रवादी पीपुल्स कांग्रेस ऑफ इंडिया (NPCI) में अपना विलय कर लिया है। इस कदम ने न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी समीकरण बदल दिए हैं क्योंकि इस नए गुट ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बिना शर्त समर्थन देने का फैसला किया है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के केंद्र में पार्टी के वरिष्ठ नेता और असंतुष्ट सांसद हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बागियों का आरोप है कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है और फैसले कुछ ही लोगों के हाथ में केंद्रित हो गए हैं। इस विलय के बाद, बागी गुट के नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य बंगाल के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से प्रवासी बंगालियों के लिए यह खबर काफी महत्व रखती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अक्सर पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिरता और विकास को करीब से देखते हैं। एनडीए के साथ इस नए गठबंधन से राज्य में केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन और निवेश की संभावनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है, जिस पर वैश्विक भारतीय समुदाय की नजर रहती है। कई प्रवासियों का मानना है कि इस तरह के राजनीतिक बदलावों का सीधा असर राज्य की कानून-व्यवस्था और आर्थिक नीतियों पर पड़ता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह टूट लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़ा करती है। जहां एक ओर टीएमसी नेतृत्व इसे 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' का नतीजा बता रहा है, वहीं बागी गुट इसे 'बंगाल के सम्मान की लड़ाई' करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विलय का प्रभाव राज्य विधानसभा के आगामी सत्रों और स्थानीय निकाय चुनावों पर कैसा पड़ता है। फिलहाल, दिल्ली और कोलकाता के गलियारों में इस गठबंधन की भावी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
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