राजनीति
तृणमूल कांग्रेस में बड़ी बगावत: 4 दिन में 4 राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा, पार्टी विभाजन की कगार पर
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 08:00 pm
ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में भारी उथल-पुथल मची है। चार दिनों में चार राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि पार्टी के भीतर दो गुटों में टकराव तेज हो गया है।
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रही है। पिछले चार दिनों के भीतर पार्टी के 13 राज्यसभा सांसदों में से चार ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। गुरुवार को राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक ने सदन की सदस्यता छोड़ दी, जिससे पार्टी नेतृत्व के भीतर खलबली मच गई है।
इस्तीफों का यह सिलसिला 8 जून को शुरू हुआ था जब सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा और पार्टी दोनों से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद 10 जून को सुष्मिता देव ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया। महज 96 घंटों के भीतर चार वरिष्ठ नेताओं का जाना ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह केवल व्यक्तिगत असंतोष नहीं, बल्कि एक सुनियोजित बगावत का हिस्सा है।
पार्टी के भीतर केवल राज्यसभा ही नहीं, बल्कि लोकसभा और विधानसभा स्तर पर भी भारी फूट के दावे किए जा रहे हैं। टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि पार्टी के 20 लोकसभा सांसद पहले ही एक अलग गुट बना चुके हैं। इसके अलावा, राज्य विधानसभा में टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 विधायकों का एक अलग समूह तैयार हो गया है। यदि ये दावे सच साबित होते हैं, तो टीएमसी को विधानसभा और संसद दोनों जगह बड़ी टूट का सामना करना पड़ सकता है।
इस संकट के बीच पार्टी के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक, कल्याण बनर्जी के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। बनर्जी ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के बीच चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ममता बनर्जी को अब यह तय करना होगा कि वह उन्हें (कल्याण को) चुनेंगी या अभिषेक बनर्जी को। यह बयान पार्टी के पुराने वफादारों और नई पीढ़ी के नेतृत्व के बीच बढ़ते फासले को दर्शाता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले लोगों के लिए यह खबर चिंता का विषय है। सिडनी और मेलबर्न में सक्रिय बंगाली डायस्पोरा भारत की राजनीतिक स्थिरता पर बारीकी से नजर रखता है। जानकारों का मानना है कि टीएमसी के भीतर का यह घमासान न केवल बंगाल की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता को भी कमजोर कर सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें ममता बनर्जी के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस संभावित टूट को कैसे रोकती हैं।
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