राजनीति
बलरामपुर: तीन साल बाद भी अधूरा है स्कूल का अतिरिक्त कक्ष, एक कमरे में दो कक्षाएं लगने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 03:37 pm

बलरामपुर के बिरनीपारा में 'स्कूल जतन योजना' के तहत बन रहे अतिरिक्त कक्षों का काम अधूरा रहने से ग्रामीण नाराज हैं। तीन साल से छात्र एक ही कमरे में बैठने को मजबूर हैं।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिले के राजपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय माध्यमिक शाला बिरनीपारा में पिछले तीन वर्षों से अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। 'स्कूल जतन योजना' के तहत स्वीकृत इस परियोजना के पूरा न होने के कारण छात्र-छात्राओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि जगह की कमी के चलते एक ही कमरे में दो अलग-अलग कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है, जिससे न केवल पढ़ाई का माहौल खराब हो रहा है, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अतिरिक्त कक्ष के निर्माण के लिए शासन द्वारा 16.40 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार को सौंपी गई थी, लेकिन तीन साल बीत जाने के बावजूद भवन आज भी अधूरा खड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार की लापरवाही और विभाग की उदासीनता के कारण काम कछुआ गति से चल रहा है। कई बार शिकायत करने के बाद भी अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है, जिससे स्थानीय निवासियों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है।
स्कूल के शिक्षकों और छात्रों का कहना है कि एक ही कमरे में दो कक्षाओं के बैठने से शोर-शराबा अधिक होता है, जिससे शिक्षकों को पढ़ाने और छात्रों को विषय समझने में काफी कठिनाई होती है। बुनियादी ढांचे की इस कमी ने शिक्षा के अधिकार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए जनपद पंचायत के सीईओ आशुतोष चतुर्वेदी ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार को जल्द से जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए जाएंगे और यदि फिर भी लापरवाही पाई जाती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि बच्चों की शिक्षा में आ रही इस बाधा को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा।
यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में हो रही देरी की व्यापक समस्या को दर्शाता है। विदेशी भारतीय (प्रवासी) समुदाय, जो अक्सर अपने पैतृक गांवों में शिक्षा और विकास के लिए निवेश और समर्थन करते हैं, इस तरह की प्रशासनिक विफलताओं को लेकर चिंतित रहते हैं। बलरामपुर की यह घटना शासन-प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
संबंधित ख़बरें

राजनीति
ट्रंप ने 'डेलाइट सेविंग टाइम' को स्थायी बनाने के लिए अमेरिकी सीनेट से किया समर्थन का आग्रह
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में घड़ी की सुइयों को साल में दो बार बदलने की परंपरा को समाप्त कर 'डेलाइट सेविंग टाइम' को स्थायी बनाने वाले विधेयक का समर्थन किया है।
5 अग॰ 2026, 05:39 pm

राजनीति
PM मोदी का वीडियो हटाने पर Meta की मुश्किलें बढ़ीं, संसदीय समिति ने मार्क ज़करबर्ग को दिया 3 दिन का अल्टीमेटम
संसदीय समिति ने पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा प्रमुख मार्क ज़करबर्ग को 3 दिन की मोहलत दी है। माफी न मांगने पर 'सेफ हार्बर' सुरक्षा छिन सकती है।
5 अग॰ 2026, 05:37 pm

राजनीति
भारत ने PoJK में चुनावों को बताया 'ढोंग', मानवाधिकारों के हनन और हिंसा पर पाकिस्तान को घेरा
भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थानीय चुनावों को खारिज करते हुए इन्हें एक दिखावा करार दिया है और क्षेत्र में हो रही हिंसा पर चिंता जताई है।
5 अग॰ 2026, 04:39 pm

