राजनीति
भारत ने PoJK में चुनावों को बताया 'ढोंग', मानवाधिकारों के हनन और हिंसा पर पाकिस्तान को घेरा
ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 04:39 pm

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थानीय चुनावों को खारिज करते हुए इन्हें एक दिखावा करार दिया है और क्षेत्र में हो रही हिंसा पर चिंता जताई है।
भारत सरकार ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हाल ही में आयोजित स्थानीय चुनावों को सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली ने इन चुनावों को एक 'पूर्ण ढोंग' (complete farce) करार देते हुए कहा है कि इस तरह की खोखली कवायद जमीनी हकीकत को छिपा नहीं सकती। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि पाकिस्तान इन दिखावटी चुनावों के जरिए दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि वहां की जनता पाकिस्तानी शासन के खिलाफ सड़कों पर है।
प्रवक्ता जायसवाल ने इस बात पर जोर दिया कि PoJK में वास्तविक स्थिति चुनाव नहीं, बल्कि वहां की जनता द्वारा किए जा रहे व्यापक विरोध प्रदर्शन हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा निर्दोष लोगों की 'अंधाधुंध हत्याएं' वहां की भयावह स्थिति को बयां करती हैं। भारत का रुख स्पष्ट है कि पूरा जम्मू, कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और पाकिस्तान का वहां अवैध कब्जा है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम काफी संवेदनशील है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय, विशेषकर वे जो जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं, इस क्षेत्र की सुरक्षा और मानवाधिकारों की स्थिति पर करीबी नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के नागरिक अक्सर वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाते रहे हैं। भारत के इस कड़े रुख से प्रवासी भारतीयों के बीच यह संदेश गया है कि भारत सरकार अपनी संप्रभुता और वहां के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि जून के बाद से क्षेत्र में असंतोष की लहर बढ़ी है। आर्थिक बदहाली, बढ़ती महंगाई और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने स्थानीय लोगों को विद्रोह के लिए मजबूर किया है। जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भटकाने के लिए इन फर्जी चुनावी प्रक्रियाओं का सहारा लेता है, लेकिन वहां हो रहे मानवाधिकारों के हनन और नागरिक स्वतंत्रता के दमन को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि को और अधिक कमजोर करेगा। जहां एक ओर पाकिस्तान खुद को लोकतंत्र का हिमायती दिखाने की कोशिश करता है, वहीं दूसरी ओर अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में वह सैन्य बल के जरिए आवाज दबाने का काम कर रहा है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपने कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली नहीं करता और आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, तब तक क्षेत्रीय स्थिरता संभव नहीं है।
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