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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का नया कीर्तिमान: 3.30 लाख रजिस्ट्रेशन के साथ दो-पहिया वाहनों ने रचा इतिहास
ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 03:37 pm

भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जहां कुल पंजीकरण 3.30 लाख तक पहुंच गया है और दो-पहिया सेगमेंट ने पहली बार 2 लाख का आंकड़ा पार किया है।
भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बड़े बदलाव की लहर साफ़ देखी जा सकती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के पंजीकरण ने 3.30 लाख के सर्वकालिक उच्च स्तर को छूकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस ऐतिहासिक बढ़त में सबसे महत्वपूर्ण योगदान दो-पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों का रहा है, जिनकी मासिक बिक्री ने पहली बार 2 लाख का आंकड़ा पार किया है। यह मील का पत्थर न केवल तकनीकी प्रगति को दर्शाता है, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के व्यवहार में आए उस बड़े बदलाव की ओर भी इशारा करता है, जहां अब पेट्रोल वाहनों के मुकाबले बैटरी से चलने वाले वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक दो-पहिया वाहनों की यह सफलता मुख्य रूप से शहरी यातायात और कम दूरी की यात्राओं के लिए उनकी उपयोगिता के कारण है। बढ़ती तेल की कीमतों और पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता ने आम नागरिकों को इलेक्ट्रिक स्कूटरों और मोटरसाइकिलों की ओर आकर्षित किया है। ओला इलेक्ट्रिक, टीवीएस मोटर, एथर एनर्जी और बजाज जैसे प्रमुख खिलाड़ियों ने बाजार में किफायती और आधुनिक फीचर्स वाले मॉडल पेश किए हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और कीमतें उपभोक्ताओं के बजट के अनुकूल हुई हैं। इसके अतिरिक्त, टियर-2 और टियर-3 शहरों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी इस वृद्धि का एक मुख्य कारण माना जा रहा है।
भारत सरकार की 'फेम-II' (FAME-II) योजना और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी ने इस क्रांति को गति प्रदान की है। नीतिगत समर्थन के कारण न केवल निर्माण लागत में कमी आई है, बल्कि खरीददारों के लिए प्रारंभिक निवेश भी कम हुआ है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष गर्व का विषय है, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े दो-पहिया वाहन बाजारों में से एक है और अब वह हरित ऊर्जा (Green Energy) की दिशा में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया में भी जहां इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर चर्चाएं तेज हैं, भारत का यह मॉडल कम लागत वाली मोबिलिटी के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
हालांकि, इस सफलता के साथ कुछ चुनौतियां भी बरकरार हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी की यात्रा के लिए अभी भी चार्जिंग स्टेशनों के सघन नेटवर्क की आवश्यकता है। साथ ही, बैटरी की रीसाइक्लिंग और स्वदेशी बैटरी निर्माण को बढ़ावा देना भविष्य की स्थिरता के लिए अनिवार्य होगा। आने वाले त्योहारी सीजन में इन आंकड़ों में और भी उछाल आने की उम्मीद है। भारत का यह 'इलेक्ट्रिक सफर' न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। ICN24 के माध्यम से हम इस प्रगति पर नजर बनाए रखेंगे, जो न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक पर्यावरण के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
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